लालकुआं : सरकारी विसंगति के चलते अंतिम सांसे गिन रहा है उत्तर भारत की रेता बजरी की सबसे बड़ी मंडी

पढ़ें हिमालय प्रहरी की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

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विपिन जोशी, लालकुआंः
कभी गौला नदी की रेता बजरी पूरे उत्तर भारत में अपनी अलग पहचान रखता था लेकिन आज सरकार की विसंगतियों के चलते राज्य की आर्थिक रीड़ का काम करने वाला खनन कारोबार सिकुडता जा रहा है। विडंबना है कि रायल्टी अत्यधिक महंगी होने के कारण आज उत्तर भारत की रेता बजरी की सबसे बडी मंडी के रूप में जाने जाने वाले लालकुआं व अन्य हिस्सों में बाहरी प्रदेशों का उपखनिज पहुंच रहा है।
दरअसल खनन विभाग, वन विकास निगम व वन निगम द्वारा गौला नदी से करीब 30.50 रूपए प्रति क्विंटल की रायल्टी ली जाती है। जिसमें खनन विभाग की आठ रूपए प्रति क्विंटल की रायल्टी के अलावा वन विकास निगम व वन विभाग के खर्चे के साथ ही जीएसटी व अन्य कर सम्मलित है। लगभग यही हाल प्रदेश की उन सभी नदियों का है जिसमें वन विकास निगम खनन करवाता है। जबकि समतलीकरण व पट्टों में यह रायल्टी मात्र सात रूपए क्विंटल है। यही नही अन्य प्रदेशों में सात रूपए प्रति क्विंटल की ही रायल्टी ली जाती है। इसके अलावा प्रदेश की नदियों में वनज की बाध्यता होने के कारण यहा से उपखनिज ढोने वाले वाहन भाडा भी अधिक लेते है। जबकि समतलीकरण व अन्य प्रदेशों से उपखनिज ढोने वाले वाहन काफी कम भाडे में उपखनिज का ढुलान कर देते है। ऐसे में गौला समेत अन्य नदियों में अत्यधिक रायल्टी पडने के कारण यहा का उपखनिज काफी महंगा हो जाता है जिसकारण यहां से रेता बजरी का कारोबार अंतिम सांस गिन रहा है।

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नदियों के बजाय अन्य माध्यमों से उपखनिज की जुगत में लगे क्रशर स्वामी
लालकुआं: नदियों में रायल्टी अधिक होने के कारण क्रशर स्वामी भी गौला नदी के बजाय समतलीकरण, नीजि पट्टों व अन्य माध्यमों से उपखनिज की व्यवस्था करने के जुगत में लगे है। यही कारण है पूरे प्रदेश में नई समतलीकरण नीति के तहत समतलीकरण के आवेदनों की संख्या बढ़ती जा रही है।

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क्रशर स्वामियों ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन
लालकुआंः कुमाउ स्टोन क्रशर ऐसोशिएसन द्वारा मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर रालल्टी व वन निगम के खर्चो को कम करने की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि गौला नदी से उपखनिज खरीदने में करीब 30.50 पैसे प्रति क्विंटल की रायल्टी देनी पड़ती है जबकि अन्य प्रदेशों में यह खर्चा मात्र सात रूपए प्रति क्विंटल की लगता है। उन्होने खनन विभाग की रायल्टी को सात रूपए करने व वन विकास निगम के अनावश्यक खर्चो में कटौती कर टोटल रालल्टी को 19 रुपए प्रति क्विंटल करने की मांग की है।

खनन विभाग गौला नदी से रायल्टी व अन्य कर के मद में नौ रुपए व नीजि खनन पट्टों से 10 रुपए की रायल्टी व अन्य करों के रूप में लिया जाता है। नदियों से अन्य पैसा निगम द्वारा लिए जाते है।
एसएल प्रेट्रिक , निदेशक खनन विभाग

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गौला नदी में रायल्टी भी महंगी है और भाड़ा भी अधिक लगता हैँ। लागत अधिक होने से माल मंहगा होने के कारण ग्राहक गायब हो गए है। जिससे क्रशर चलाना मुश्किल हो रहा है।
राजेश अग्रवाल, अध्यक्ष कुमाऊ स्टोन क्रशर ऐसोशिएसन

रॉयल्टी व वन विकास निगम के खर्चे

बेसिक रायल्टी – 8.50
स्टांप शुल्क – 0.17
लाभांश -0.85
जिला खनन फाउंडेशन खर्च -/2.13
परिचालन व्यय – 7.32
सुरक्षा व सीमांकऩ – 0.50
क्षतिपूर्ति – 1.28
जीएसटी – 1.04
आयकर – 0.55
अभिवहन शुल्क – 5.90
तुलाई व्यय -/0.55
तुलाई पर जीएसटी – 0.03
तुलाई पर आयकर – 0.01
परमिट शुल्क – 1.20
कुल – 30.04
(दरे – रुपए प्रति कुंतल)

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