ममता हारी, मौत जीत गई… बेटों को बचाने टैंक में उतरी मां भी जहरीली गैस की भेंट चढ़ी

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गौलापार के मानपुर गांव में निर्माणाधीन पानी के टैंक में दम घुटने से मां और दो बेटों की मौत, पलभर में उजड़ गया हंसता-खेलता परिवार

राजू अनेजा,हल्द्वानी।गौलापार के मानपुर गांव में मंगलवार को ऐसा दर्दनाक हादसा हुआ जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। निर्माणाधीन पानी के टैंक में जहरीली गैस की चपेट में आने से पहले दो बेटे बेहोश होकर गिर पड़े। जब काफी देर तक दोनों बाहर नहीं निकले तो 65 वर्षीय मां सरस्वती देवी से अपने बेटों की तड़प देखी नहीं गई। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना टैंक में छलांग लगा दी, लेकिन ममता भी मौत को मात नहीं दे सकी। जहरीली गैस ने मां और दोनों बेटों की जिंदगी एक साथ छीन ली।

 

बेटों की सलामती की आस में मौत के मुंह में उतरी मां

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार धर्मेंद्र और खुशाल सिंह निर्माणाधीन पानी के टैंक में उतरे थे। कुछ देर बाद दोनों की कोई आवाज नहीं आई। बाहर खड़े लोगों को अनहोनी की आशंका हुई, लेकिन टैंक के भीतर जहरीली गैस होने के डर से कोई नीचे उतरने की हिम्मत नहीं जुटा सका। तभी मां सरस्वती देवी अपने बेटों को बचाने की उम्मीद में टैंक में उतर गईं। कुछ ही क्षणों में वह भी अचेत हो गईं। देखते ही देखते एक मां और उसके दोनों बेटों की जिंदगी खत्म हो गई।

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एसटीएच में गूंजी चीत्कार, हर आंख हो गई नम

तीनों को सुशीला तिवारी अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत की पुष्टि होते ही अस्पताल परिसर में कोहराम मच गया। परिजन शवों से लिपटकर बिलख पड़े। महिलाओं की चीख-पुकार से अस्पताल का माहौल गमगीन हो गया। वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।

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12 साल पहले सिर से उठा था पिता का साया, अब उजड़ गया पूरा सहारा

परिवार पर यह दूसरा बड़ा वज्रपात है। करीब 12 वर्ष पहले सड़क दुर्घटना में धर्मेंद्र और खुशाल के पिता भीम सिंह की मौत हो गई थी। उसके बाद मां सरस्वती देवी ने संघर्ष कर परिवार को संभाला। अब मां और दोनों बेटों की एक साथ मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। सरस्वती देवी की दो बेटियां विवाहित हैं। धर्मेंद्र अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी छोड़ गए हैं, जबकि खुशाल अपनी पत्नी और बेटे को बेसहारा छोड़ गए।

 

दो कमाऊ बेटे चले गए, परिवार पर रोजी-रोटी का संकट

परिवार के पास बहुत कम खेती योग्य जमीन है। धर्मेंद्र प्लंबर का काम करते थे और खेती में भी हाथ बंटाते थे। खुशाल सिंह सितारगंज सिडकुल की एक कंपनी में इलेक्ट्रिशियन थे। दोनों ही परिवार की आर्थिक रीढ़ थे। उनकी असमय मौत के बाद परिजनों के सामने आजीविका का गहरा संकट खड़ा हो गया है।

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एक पल में उजड़ गई तीन जिंदगियां

मानपुर गांव में इस हादसे के बाद शोक की लहर है। जिसने भी मां की ममता और दोनों बेटों की मौत की यह दर्दनाक कहानी सुनी, उसकी आंखें भर आईं। गांव में हर जुबान पर बस एक ही बात है—अगर समय रहते बचाव के पर्याप्त इंतजाम होते, तो शायद यह परिवार आज भी सलामत होता।

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