
राजू अनेजा,काशीपुर। कुमाऊँ अंचल के पाँचों नगर निगम—काशीपुर, रुद्रपुर, हल्द्वानी-काठगोदाम, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़—लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल सिद्धांतों से भटकते नज़र आ रहे हैं। नगर निगम अधिनियम में स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद इन निगमों में न तो नियमानुसार बैठकें बुलाई जा रही हैं और न ही पार्षदों को उनकी संवैधानिक भूमिका निभाने का अवसर दिया जा रहा है।
यह गंभीर और चौंकाने वाला खुलासा सूचना अधिकार कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता नदीम उद्दीन द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ है। आरटीआई में वर्ष 01 जनवरी 2025 से सूचना उपलब्ध कराने की तिथि तक हुई नगर निगम/बोर्ड बैठकों का ब्योरा एवं उनके कार्यवृत्त मांगे गए थे। कुमाऊँ के सभी नगर निगमों के लोक सूचना अधिकारियों ने अपने-अपने निगमों की बैठक संबंधी सूचनाएं उपलब्ध कराईं, जिनसे नगर निगमों की कार्यप्रणाली की पोल खुल गई।
काशीपुर: पूरे साल में सिर्फ़ दो बैठकें
नगर निगम काशीपुर के लोक सूचना अधिकारी/सहायक नगर आयुक्त द्वारा पत्रांक 945 दिनांक 22-11-2025 से दी गई जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में मात्र दो बोर्ड बैठकें आयोजित की गईं।
05 फरवरी 2025 को नगर प्रमुख दीपक बाली की अध्यक्षता में पहली बैठक हुई, जिसमें 40 पार्षद उपस्थित रहे और 3 प्रस्ताव पारित किए गए।
03 मार्च 2025 को दूसरी बैठक हुई, जिसमें 39 पार्षद उपस्थित थे और 24 प्रस्ताव पारित किए गए।
इसके बाद पूरे वर्ष कोई भी बोर्ड बैठक नहीं बुलाई गई, जो अधिनियम का सीधा उल्लंघन है।
रुद्रपुर: बैठकों का दावा, कार्यवृत्त अधूरे
नगर निगम रुद्रपुर के लोक सूचना अधिकारी द्वारा पत्रांक 779 दिनांक 04-12-2025 से सूचना दी गई कि बोर्ड की तीन बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन केवल दो बैठकों के कार्यवृत्त ही उपलब्ध कराए गए।
07 फरवरी 2025 को मेयर विकास शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में विधायक शिव अरोरा, विधायक तिलक राज बेहड़ एवं 40 पार्षद उपस्थित थे। इसमें केवल एक प्रस्ताव पारित किया गया।
18 फरवरी 2025 की बैठक में मेयर, दोनों विधायक और 39 पार्षद मौजूद थे, जिसमें एक विशेष प्रस्ताव पारित हुआ।
तीसरी बैठक का न तो कार्यवृत्त उपलब्ध कराया गया और न ही स्पष्ट विवरण दिया गया।
हल्द्वानी: साल भर में एक ही बैठक
नगर निगम हल्द्वानी-काठगोदाम के लोक सूचना अधिकारी ने पत्रांक 1909 दिनांक 17-12-2025 से सूचना उपलब्ध कराई। इसके अनुसार
26 मार्च 2025 को महापौर गजराज बिष्ट की अध्यक्षता में केवल एक बोर्ड बैठक आयोजित हुई।
इस बैठक में 56 पार्षद उपस्थित थे और 11 विशेष प्रस्ताव पारित किए गए।
पूरे साल में सिर्फ़ एक बैठक होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गहरा सवाल खड़ा करता है।
अल्मोड़ा: तीन बैठकें, पर नियम फिर भी अधूरे
नगर निगम अल्मोड़ा के लोक सूचना अधिकारी दीपक चन्द्र जोशी ने पत्रांक 39 दिनांक 03-01-2026 से तीन बैठकों के कार्यवृत्त उपलब्ध कराए।
07 फरवरी 2025: 40 पार्षदों की उपस्थिति में 44 प्रस्ताव
29 अप्रैल 2025: 37 पार्षदों की उपस्थिति में 63 प्रस्ताव
05 अगस्त 2025: 36 पार्षदों की उपस्थिति में 43 प्रस्ताव
हालांकि प्रस्तावों की संख्या अधिक रही, लेकिन न्यूनतम छह बैठकों का नियम यहां भी पूरा नहीं हुआ।
पिथौरागढ़: सबसे ज़्यादा बैठकें, फिर भी कानून से कम
नगर निगम पिथौरागढ़ के लोक सूचना अधिकारी/सहायक नगर आयुक्त ने पत्रांक 1259 दिनांक 29-11-2025 से पाँच बैठकों के कार्यवृत्त उपलब्ध कराए।
06 फरवरी 2025: 37 पार्षद, 5 प्रस्ताव
22 फरवरी 2025: 36 पार्षद, 3 प्रस्ताव
10 मार्च 2025: 38 पार्षद, 17 प्रस्ताव
21 अप्रैल 2025: 34 पार्षद, 9 प्रस्ताव
03 सितम्बर 2025: 30 सदस्यों की उपस्थिति में 9 प्रस्ताव
यहां भी अधिनियम के अनुसार आवश्यक छह बैठकों की शर्त पूरी नहीं हुई।
कानून की खुली अवहेलना
नदीम उद्दीन (एडवोकेट) के अनुसार नगर निगम अधिनियम की
धारा 88: वर्ष में कम से कम 6 अधिवेशन और दो माह से अधिक का अंतर नहीं
धारा 91: बैठक की सूचना 96 घंटे पूर्व अनिवार्य
धारा 92: बहुमत से निर्णय
धारा 98: पार्षदों को प्रश्न पूछने का अधिकार
इन सभी धाराओं की कुमाऊँ के नगर निगमों में खुलेआम अनदेखी की जा रही है।
लोकतंत्र पर सवाल, शासन पर दबाव
नगर निगमों की बैठकों का न होना केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि जनता और पार्षदों के अधिकारों का हनन है। सवाल यह है कि
क्या सरकार और शासन इस अलोकतांत्रिक रवैये पर कार्रवाई करेंगे?
या फिर कुमाऊँ के नगर निगम यूँ ही मेयर-केंद्रित सत्ता के सहारे चलते रहेंगे?
फिलहाल आरटीआई से उजागर इस सच ने कुमाऊँ के शहरी लोकतंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

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