62 के हुए विधायक त्रिलोक चीमा: अनुभव, संगठन और जमीनी पकड़ के साथ दूसरी पारी की निर्णायक तैयारी

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राजू अनेजा,काशीपुर। उम्र भले 62 हो चुकी हो, लेकिन भाजपा विधायक त्रिलोक चीमा की राजनीतिक सक्रियता और चुनावी तैयारी यह संकेत दे रही है कि वे विधानसभा की दूसरी पारी को निर्णायक बनाने के मूड में हैं। पिता हरभजन सिंह चीमा से मिली राजनीतिक विरासत को उन्होंने समय के साथ केवल निभाया ही नहीं, बल्कि उसे अपने काम और व्यवहार से जनाधार में बदला है।
बीते चार वर्षों में त्रिलोक चीमा ने विकास को महज़ प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति के रूप में साधा। सड़क, पेयजल, पथ प्रकाश, नाली और ग्रामीण अधोसंरचना से जुड़े कार्यों को विधानसभा में लगातार उठाकर उन्होंने यह संदेश दिया कि वे चुनावी समय के नेता नहीं, बल्कि स्थायी मौजूदगी वाले जनप्रतिनिधि हैं।
विधायक चीमा की राजनीति की सबसे अहम पहचान रही उनकी “चौपाल आधारित रणनीति”। विधानसभा के प्रत्येक गांव में चौपाल लगाकर जनता से सीधा संवाद, मौके पर अधिकारियों की मौजूदगी और समस्याओं का तत्काल निस्तारण—इस मॉडल ने उन्हें विपक्ष के मुकाबले जमीनी बढ़त दिलाई। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक यह वही स्तर है, जहां चुनावी समीकरण तय होते हैं।
संगठनात्मक दृष्टि से भी त्रिलोक चीमा ने खुद को मजबूत किया है। पंचायत प्रतिनिधियों, बूथ कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं के साथ निरंतर संपर्क ने पार्टी के कोर कैडर को सक्रिय रखा। यही कारण है कि आज वे केवल विधायक नहीं, बल्कि विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के केंद्रीय चेहरा माने जाते हैं।
62वें जन्मदिन पर जिस तरह से समर्थकों और कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटी, उसे राजनीतिक हलकों में शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है। यह साफ संकेत है कि संगठन के भीतर उनकी स्वीकार्यता बरकरार है और आगामी चुनावों में उनका नाम स्वाभाविक दावेदार के तौर पर सामने है।
राजनीतिक संदेश स्पष्ट है —
अनुभव, संगठन, विकास और जनसंवाद के चार मजबूत स्तंभों पर खड़े त्रिलोक चीमा विपक्ष के लिए आसान चुनौती नहीं होंगे।
अब मैदान केवल चुनाव का नहीं,
बल्कि रणनीति, पकड़ और भरोसे की राजनीति का है—
और इस मैदान में त्रिलोक चीमा पूरी तैयारी के साथ खड़े नजर आ रहे हैं।

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