लालकुआं (बिंदुखत्ता)। कारगिल विजय दिवस के पावन अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता हेमवती नंदन दुर्गापाल ने समस्त देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने बिंदुखत्ता स्थित शहीद स्मारक पहुंचकर कारगिल युद्ध में देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर शहीदों की प्रतिमाओं पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
दुर्गापाल ने देवभूमि के जवानों की वीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तराखंड के वीर सपूतों का देश की रक्षा में हमेशा अग्रणी योगदान रहा है। कारगिल युद्ध के दौरान इस पावन धरती के जांबाज सैनिकों ने जिस शौर्य, अदम्य साहस और पराक्रम का परिचय दिया, उस पर पूरे देश को गर्व है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के वीरों ने अपने प्राणों की आहुति देकर यह साबित किया कि जब भी देश की आन-बान और शान पर आंच आएगी, देवभूमि का हर घर देश की ढाल बनकर खड़ा रहेगा। इन अमर बलिदानियों का त्याग हमेशा हमारी आने वाली पीढ़ियों को ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की सीख देता रहेगा।
बिंदुखत्ता और लालकुआं की क्रांतिकारी भूमि को नमन करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी यह धरती केवल फसलों से नहीं, बल्कि देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले जांबाजों की वीरता से सींची गई है। बिंदुखत्ता के वीर शहीदों ने कारगिल की दुर्गम चोटियों पर जो पराक्रम दिखाया, उसने देश के इतिहास में हमारा नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज करा दिया है। उन्होंने क्षेत्रीय जनता से आह्वान किया कि शहीदों के परिवारों के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहकर उन्हें समाज में सर्वोच्च सम्मान दें, क्योंकि शहीदों का सम्मान ही हमारी असली राष्ट्रभक्ति है।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित स्थानीय जनप्रतिनिधियों, पूर्व सैनिकों और भारी संख्या में क्षेत्रवासियों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीद परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और एकजुटता प्रकट की।
कार्यक्रम में मोहन कुड़ाई ,भरत नेगी, लालकुआं नगर पंचायत अध्यक्ष व पूर्व सैनिक सुरेंद्र लोटनी, व्यापार मंडल महामंत्री नंदन राणा, कैप्टन चंचल सिंह कोरंगा, कैप्टन प्रताप सिंह बिष्ट, कैप्टन इंद्र सिंह पनेरी, कैप्टन कुशाल सिंह कोश्यारी, कैप्टन दलबीर सिंह कपोला, प्रकाश मिश्रा, सूबेदार रणजीत सिंह, सूबेदार भगत सिंह, सूबेदार कुंदन सिंह, सूबेदार आन सिंह धामी, कैप्टन नरेंद्र सिंह गाड़िया, गोपाल नेगी, दीपक नेगी, हरीश डसीला, कैप्टन नरसिंह, कैप्टन नारायण सिंह और कैप्टन धर्म सिंह रमोला समेत सैकड़ों पूर्व सैनिक एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।
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