देहरादून में प्रतिबंधित ‘इंडियन रूफ्ड टर्टल’ के साथ 1 युवक गिरफ्तार: वन विभाग ने 2 कछुए किए बरामद, आरोपी 14 Days के लिए जेल भेजा गया

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देहरादून। राजधानी देहरादून के शहरी क्षेत्र में प्रतिबंधित वन्यजीवों को घर में पालने और तस्करी का एक और नया मामला सामने आया है। मालसी रेंज के कांवली क्षेत्र में वन विभाग की टीम ने मुखबिर की सटीक सूचना पर छापेमारी कर 2 इंडियन रूफ्ड टर्टल (Pangshura Tecta) बरामद किए हैं। इस कार्रवाई के दौरान 27-Year-Old युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।

कुछ समय पूर्व भी दून में प्रतिबंधित प्रजाति के तोतों की तस्करी के मामले में 4 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से वन विभाग सतर्क हो गया है।

14 Days की न्यायिक हिरासत में भेजा गया आरोपी

वन विभाग की टीम ने दोनों कछुओं को अपने कब्जे में लेकर सुरक्षित रूप से विभागीय कार्यालय पहुंचाया और आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया।

  • अदालती कार्रवाई: पूछताछ के बाद आरोपी युवक को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे 14 Days की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।

  • आरोपी का दावा: पूछताछ में 27-Year-Old आरोपी ने दावा किया कि वह इन कछुओं को अपने एक दोस्त से लाया था और उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि इंडियन रूफ्ड टर्टल को घर में रखना गैरकानूनी है।

  • गहन जांच शुरू: मामले की जांच SDO स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। विभाग यह पता लगा रहा है कि कछुओं को उपलब्ध कराने वाला मुख्य व्यक्ति कौन है और क्या इसके पीछे किसी संगठित नेटवर्क का हाथ है। जांच पूरी होने पर कोर्ट में Charge-Sheet दाखिल की जाएगी।

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जानिए क्या है ‘इंडियन रूफ्ड टर्टल’?

इंडियन रूफ्ड टर्टल (Pangshura Tecta) मीठे पानी का एक विशेष कछुआ है।

  • पहचान: इसके ऊपरी खोल (Shell) का आकार छत की तरह ऊंचा होता है। इसके सिर और गर्दन पर पीली या नारंगी धारियां पाई जाती हैं।

  • आकार: इसकी अधिकतम लंबाई करीब 20 to 23 Centimeters तक होती है।

  • संरक्षण स्थिति: यह वन्यजीव संरक्षण कानून (Wildlife Protection Act) के तहत पूरी तरह संरक्षित प्रजाति है। इसे पकड़ना, घर में रखना, खरीदना या बेचना गंभीर कानूनी अपराध है।

‘अज्ञानता का दावा कार्रवाई से बचने के लिए पर्याप्त नहीं’ — DFO

देहरादून के DFO नीरज शर्मा ने कहा— “वन्यजीवों को लेकर आम जनता में जागरूकता होना बेहद जरूरी है। कई लोग जानकारी के अभाव या शौक में कछुओं को घर ले आते हैं। किसी भी जंगली जीव को घर में रखने से पहले यह जानना जरूरी है कि वह संरक्षित श्रेणी में है या नहीं। अज्ञानता का दावा कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए काफी नहीं होता।”

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