संगठन या व्यक्ति? कुमारी सैलजा का हरीश रावत पर बड़ा तंज; बोलीं—’कोई भी पार्टी से बड़ा नहीं
हरिद्वार/देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और पार्टी आलाकमान के बीच शुरू हुआ सियासी घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी कुमारी सैलजा ने बुधवार को हरिद्वार दौरे के दौरान वरिष्ठ नेता हरीश रावत की समानांतर राजनीतिक गतिविधियों को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा बयान दिया है। सैलजा ने दोटूक शब्दों में स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी का एक महान इतिहास है और कोई भी व्यक्ति संगठन से ऊपर या बड़ा नहीं हो सकता।
‘वोट बचाओ देश बचाओ’ यात्रा में पहुंचीं सैलजा; मंच से दी नसीहत
बुधवार को कुमारी सैलजा हरिद्वार के शिवमूर्ति चौक से सुभाष घाट तक आयोजित ‘वोट बचाओ देश बचाओ’ पदयात्रा की शुरुआत करने पहुंची थीं। इस दौरान मीडिया द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की व्यक्तिगत ‘जनसंवाद यात्रा’ और उससे उपजे अंदरूनी असंतोष पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए सैलजा का रुख बेहद सख्त नजर आया। उन्होंने अपने बगल में खड़े प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, करण माहरा और पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत की ओर इशारा करते हुए कहा कि चाहे वे खुद हों या पार्टी का कोई भी अन्य बड़ा चेहरा, संगठन और पार्टी का हित हमेशा व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर होता है।
1 अक्टूबर को जारी हुआ था नोटिस; दिल्ली तलब हुए ‘हरदा’
उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड कांग्रेस में यह विवाद तब गहराया जब हरीश रावत ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) और प्रभारी को सूचित किए बिना कुमाऊं व गढ़वाल क्षेत्र में अपनी व्यक्तिगत ‘धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा’ शुरू कर दी थी। इस पर कड़ा संज्ञान लेते हुए कुमारी सैलजा ने 1 अक्टूबर को हरीश रावत को औपचारिक पत्र भेजकर इस यात्रा को संगठन के समानांतर और अवांछित करार देते हुए तुरंत रोकने का निर्देश दिया था। हालांकि, चेतावनी के बाद भी हरीश रावत ने अपनी यात्राएं जारी रखीं, जिसके बाद अब उन्हें स्थिति स्पष्ट करने के लिए 7 अक्टूबर को दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में तलब किया गया है।
आलाकमान की बैठक से ठीक पहले बढ़ा सियासी तापमान
हरीश रावत की कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा के साथ प्रस्तावित हाई-प्रोफाइल बैठक से ठीक पहले आया यह बयान यह साफ संकेत देता है कि हाईकमान इस बार अनुशासन के मुद्दे पर किसी तरह के समझौते के मूड में नहीं है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि 7 अक्टूबर की बैठक के बाद हरीश रावत अपनी समानांतर यात्राओं को रोककर संगठन की लाइन पर आते हैं या उत्तराखंड कांग्रेस में यह कलह नया मोड़ लेती है।

