उत्तराखंड में ‘शुभ मुहूर्त’ के नाम पर सीजेरियन डिलीवरी की होड़: निजी अस्पतालों में हर दूसरा प्रसव ऑपरेशन से, एक दशक में दोगुने हुए आंकड़े
देहरादून/हल्द्वानी। बच्चे के जन्म की तारीख अब सिर्फ प्रकृति तय नहीं करती, बल्कि ‘शुभ मुहूर्त’ का चलन तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में जन्माष्टमी के पावन अवसर पर हल्द्वानी में 12 और देहरादून के निजी अस्पतालों में 20 से अधिक परिवारों ने सीजेरियन (ऑपरेशन) के जरिए बच्चे के जन्म का अनुरोध किया। हालांकि, केवल पर्व-त्योहार की चाहत ही नहीं, बल्कि राज्य में सीजेरियन प्रसव की लगातार बढ़ती दर अब प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
निजी और सरकारी अस्पतालों के आंकड़ों में बड़ा अंतर
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 (NFHS-6) के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में एक दशक के भीतर सीजेरियन प्रसव की दर लगभग दोगुनी हो चुकी है। राज्य के निजी अस्पतालों में सीजेरियन डिलीवरी की दर सरकारी अस्पतालों की तुलना में तीन गुना से भी अधिक है। निजी अस्पतालों में 47.7% यानी लगभग हर दूसरा प्रसव ऑपरेशन से हो रहा है, जबकि सरकारी अस्पतालों में यह दर मात्र 14.7% है।
सरकारी अस्पतालों से घटा भरोसा, निजी पर बढ़ी निर्भरता
रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड में संस्थागत (अस्पतालों में) प्रसव 83.2% से बढ़कर 88.9% हो गया है। हालांकि, सरकारी अस्पतालों में होने वाले प्रसव का दायरा 53.3% से घटकर 49.9% पर आ गया है, जिससे स्पष्ट है कि लोग अब निजी स्वास्थ्य सुविधाओं पर अधिक निर्भर हो रहे हैं।
उत्तराखंड में सीजेरियन प्रसव व जिलों की स्थिति
प्रसव के मुख्य मापदंड
| मापदंड | NFHS-5 | NFHS-6 |
| कुल सीजेरियन प्रसव | 20.4% | 25.9% |
| निजी अस्पताल | 43.3% | 47.7% |
| सरकारी अस्पताल | 14.0% | 14.7% |
संस्थागत प्रसव की स्थिति
| स्थिति | NFHS-5 | NFHS-6 |
| संस्थागत प्रसव | 83.2% | 88.9% |
| सरकारी अस्पतालों में शेयर | 53.3% | 49.9% |
जिलों के अनुसार सीजेरियन प्रसव का प्रतिशत (NFHS-6)
| जिला | प्रतिशत |
| नैनीताल | 30.1% |
| देहरादून | 25.8% |
| हरिद्वार | 22.1% |
| ऊधमसिंह नगर | 20.4% |
| पिथौरागढ़ | 17.0% |
| रुद्रप्रयाग | 16.7% |
| अल्मोड़ा / चम्पावत | 16.3% |
| टिहरी | 15.0% |
| बागेश्वर | 12.4% |
| गढ़वाल (पौड़ी) | 9.4% |
| चमोली | 8.8% |
| उत्तरकाशी | 6.2% |
आंकड़ों से स्पष्ट है कि नैनीताल और देहरादून जैसे मैदानी व विकसित जिलों में सीजेरियन प्रसव की दर सबसे अधिक है, जबकि उत्तरकाशी और चमोली जैसे पर्वतीय जिलों में सामान्य प्रसव का चलन अब भी अधिक बना हुआ है।
अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें


