जिंदगी बचाने को भटकता रहा पति, सिस्टम देखता रहा तमाशा; मासूम के सिर से उठा मां का साया

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सरकारी अस्पताल में प्रसव के बाद बिगड़ी महिला की हालत, रुद्रपुर रेफर के बाद काशीपुर के अस्पतालों की खाक छानता रहा पति; इलाज के अभाव में मौत का आरोप

 

 

राजू अनेजा, काशीपुर/केलाखेड़ा। प्रदेश सरकार भले ही स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर तमाम दावे कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करती नजर आई। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केलाखेड़ा में प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव से महिला की हालत बिगड़ गई। गंभीर स्थिति में उसे जिला चिकित्सालय रुद्रपुर रेफर किया गया, लेकिन पति उसे उपचार के लिए काशीपुर के निजी अस्पतालों में लेकर भटकता रहा। परिजनों का आरोप है कि समय पर उपचार नहीं मिल सका और इसी दौरान महिला ने दम तोड़ दिया। नवजात स्वस्थ बताया जा रहा है, लेकिन जन्म लेते ही उसके सिर से मां का साया उठ गया।
ग्राम बाजावाला निवासी यशपाल सिंह की पत्नी प्रकाश कौर को गुरुवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे प्रसव पीड़ा होने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केलाखेड़ा लाया गया। परिजनों के अनुसार स्वास्थ्य केंद्र में तैनात नर्सिंग स्टाफ ने महिला का प्रसव कराया। प्रसव के समय जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ बताए गए।
बताया गया कि करीब चार बजे के बाद प्रकाश कौर को अचानक अत्यधिक प्रसवोत्तर रक्तस्राव होने लगा। देखते ही देखते उनकी हालत बिगड़ने लगी। गंभीर स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य केंद्र से उन्हें तत्काल जिला चिकित्सालय रुद्रपुर रेफर कर दिया गया।

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जिला अस्पताल के बजाय काशीपुर ले गया पति

पति यशपाल सिंह के अनुसार वह पत्नी को उपचार के लिए काशीपुर के कई निजी अस्पतालों में लेकर पहुंचे। उनका आरोप है कि गंभीर हालत के चलते कई अस्पतालों में समय पर भर्ती और उपचार नहीं मिल सका। इसी दौरान प्रकाश कौर की मौत हो गई। हालांकि संबंधित निजी अस्पतालों का पक्ष अभी सामने नहीं आया है, इसलिए इन आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

 

नवजात के जन्म लेते ही छिन गई मां की ममता

 

जिस घर में बच्चे के जन्म की खुशियां मनाई जानी थीं, वहां कुछ ही घंटों में मातम पसर गया। प्रकाश कौर ने जिस नवजात को जन्म दिया, वह मां की गोद का सुख पाने से पहले ही उससे दूर हो गया। पति यशपाल सिंह के सामने अब तीन बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आ गई है। पत्नी की मौत और बच्चों की जिम्मेदारी ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

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पीएचसी में महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं

 

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केलाखेड़ा के अधीक्षक डॉ. रवि श्रीवास्तव ने बताया कि केंद्र पर महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है और यहां सामान्य प्रसव कराए जाते हैं। गुरुवार सुबह करीब साढ़े तीन बजे प्रकाश कौर को केंद्र लाया गया था। नर्सिंग स्टाफ ने प्रसव कराया और उस समय जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ थे। करीब चार बजे के बाद महिला को प्रसवोत्तर रक्तस्राव शुरू हुआ।
उन्होंने बताया कि महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए तत्काल जिला चिकित्सालय रुद्रपुर रेफर किया गया था। हालांकि स्वजन उन्हें काशीपुर के निजी अस्पतालों में ले गए, जहां समय पर उपचार नहीं मिल पाने के कारण उनकी मौत होने की सूचना मिली।

 

एक मौत ने खड़े किए स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

प्रकाश कौर की मौत ने प्रसव के बाद आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और रेफरल सिस्टम को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रसवोत्तर रक्तस्राव शुरू होने के बाद पीएचसी में महिला को तत्काल कौन-कौन सी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं? रेफर करने से पहले आवश्यक उपचार और स्थिरीकरण की क्या व्यवस्था थी? गंभीर हालत में परिजन जिला अस्पताल रुद्रपुर के बजाय काशीपुर क्यों पहुंचे? निजी अस्पतालों में उपचार मिलने में देरी हुई या नहीं?

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मासूम की किलकारी के साथ घर में छाया मातम

 

 

प्रकाश कौर ने जिस बच्चे को जन्म दिया, उसकी किलकारी परिवार के लिए खुशी लेकर आई थी, लेकिन यह खुशी कुछ ही घंटों में मातम में बदल गई। नवजात स्वस्थ बताया जा रहा है, मगर मां की मौत ने पूरे परिवार को झकझोर दिया।

 

पत्नी को खो चुके यशपाल सिंह के सामने अब अपने तीन बच्चों की जिम्मेदारी है। परिवार की आजीविका के लिए काम करना और बच्चों की परवरिश करना उनके सामने बड़ी चुनौती बन गया है। एक ओर पत्नी की मौत का गहरा सदमा है तो दूसरी ओर मासूम बच्चों का भविष्य उनकी चिंता बढ़ा रहा है।

 

 

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