भावुक विदाई और प्रतिमा विसर्जन के साथ संपन्न हुआ सातूं-आठूं पर्व: बिंदुखत्ता में उमड़ा भक्ति का सैलाब, पारंपरिक झोड़ा-चांचरी ने मोहा मन

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लालकुआं। कुमाऊं मंडल के अति महत्वपूर्ण एवं पारंपरिक लोकपर्व सातूं-आठूं (गौरा महोत्सव) का रविवार को भावुक विदाई और प्रतिमा विसर्जन के साथ समापन हो गया। बिंदुखत्ता के इंद्रानगर 2 क्षेत्र में पांच दिनों से चल रहे इस धार्मिक अनुष्ठान के अंतिम दिन भगवान महेश्वर और माता गौरा के मिलन, पूजा-अर्चना और प्रतिमा विसर्जन के दौरान भक्ति तथा पर्वतीय संस्कृति के अनूठे रंग देखने को मिले।
ढोल-दमाऊ की थाप पर निकली भव्य शोभायात्रा
वरिष्ठ समाजसेवी गोकुलानंद उपाध्याय के आवास पर रविवार सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का दौर शुरू हुआ। पंडितों के वैदिक मंत्रोचार के बीच महिलाओं ने मां गौरा और भगवान महेश्वर की विशेष पूजा-अर्चना की। शाम के समय सैकड़ों महिलाओं की उपस्थिति में गाजे-बाजे के साथ एक भव्य और मनमोहक शोभायात्रा निकाली गई।
गांव के मुख्य मार्गों से होते हुए जब शोभायात्रा गुजरी, तो ढोल-दमाऊ और पारंपरिक पर्वतीय वाद्य यंत्रों की गूंज पर महिलाओं ने पारंपरिक झोड़ा और चांचरी लोकनृत्य प्रस्तुत कर पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद बिंदेश्वर महादेव मंदिर परिसर स्थित जलाशय में विधि-विधान और भावुक विदाई गीतों के साथ प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।
धार्मिक आस्था के साथ रिश्तों की मिठास समेटे है यह पर्व
कार्यक्रम में पहुंचे बिंदेश्वर महादेव मंदिर समिति के अध्यक्ष शेर सिंह दानू ने कहा, “सांतू-आठू केवल धार्मिक पूजा-पाठ नहीं, बल्कि यह हमारी कुमाऊंनी संस्कृति में रिश्तों की मिठास का प्रतीक है। इसमें मां गौरा को बेटी व बहन तथा भगवान महेश्वर को जीजाजी के रूप में पूजने की अनोखी परंपरा है, जो महिलाओं को अपने मायके और पारिवारिक रिश्तों से भावनात्मक रूप से जोड़ती है।”
मंदिर समिति के सचिव चेतन पांडे ने बताया कि आठूं (अष्टमी) के दिन पूजा के बाद प्रतिमाओं व अंकुरित ‘बिरुड़’ का जलाशयों में विसर्जन करने के साथ ही धार्मिक आयोजन पूरा होता है, लेकिन इसके साथ ही संस्कृति को सहेजने का संकल्प भी नया होता है।
पारंपरिक लोकगीत और पौराणिक कथा का महत्व
स्थानीय जानकार सीमा रावत और तारा बिष्ट ने बताया कि आठूं के दिन भगवान शिव (महेश्वर) अपनी अर्धांगिनी मां गौरा को लेने उनके मायके आते हैं। इस पावन अवसर पर घर-आंगन में हुड़के और ढोल की थाप पर पौराणिक बणभाट कथा, गौरा-महेश के पारिवारिक जीवन के लोकगीत और झोड़ा-चांचरी गाकर महिलाएं एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटती हैं।
सांस्कृतिक कार्यक्रम में शेर सिंह दानू, किशन सिंह बिष्ट, अमित दानू, चेतन पांडे, शिवराज सिंह बिष्ट, हरीश गोस्वामी, पुरन धारियाल, सीमा रावत, माया उपाध्याय, तारा बिष्ट, किरण उपाध्याय, पुष्पा गिरी, सुनीता उपाध्याय, कमला जोशी समेत कई लोग मौजूद रहे।
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