बिंदुखत्ता को ‘राजस्व गांव’ का दर्जा न मिलने पर बिफरे मोहन कुड़ाई: कहा— “देरी की पूरी जिम्मेदार डबल इंजन सरकार”
लालकुआं। बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की दशकों पुरानी मांग को लेकर क्षेत्रीय ग्रामीणों का आक्रोश और आंदोलन लगातार जारी है। इसी क्रम में वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोहन कुड़ाई ने तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने में हो रही देरी के लिए पूरी तरह से राज्य और केंद्र की ‘डबल इंजन’ सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में भी यह मुद्दा लगातार बना हुआ है, लेकिन कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव पर कोई ठोस फैसला न होने से ग्रामीणों में गहरी निराशा है।
सांसद, विधायक और सरकार एक ही दल की, फिर देरी क्यों: मोहन कुड़ाई
वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मोहन कुड़ाई ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा, “जब क्षेत्र में विधायक, सांसद और प्रदेश में सरकार तीनों स्तरों पर एक ही पक्ष की सत्ता है, तो फिर बिंदुखत्ता की जनता को उसका जायज अधिकार देने में देरी क्यों की जा रही है? जनता आज इस ढुलमुल रवैये पर स्पष्ट जवाब मांग रही है।” उन्होंने कहा कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाने के लिए कांग्रेस पार्टी और पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वर्गीय हरीशचंद्र दुर्गापाल शुरू से ही गंभीर रहे हैं और कांग्रेस कार्यकाल में ही इस दिशा में ठोस पहल की गई थी।
मालिकाना हक न मिलने से बुनियादी अधिकारों से वंचित हैं हजारों परिवार
मोहन कुड़ाई ने दावा किया कि वर्तमान सरकार की उदासीनता के चलते यह महत्वपूर्ण मामला अधर में लटका हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में कांग्रेस सरकार के आने पर ही बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का पूर्ण अधिकार मिल सकेगा।
गौरतलब है कि राजस्व गांव का दर्जा न मिलने के कारण बिंदुखत्ता के हजारों परिवारों के पास आज भी अपनी भूमि का मालिकाना हक (खसरा-खतौनी) नहीं है। इसके चलते स्थानीय ग्रामीण बैंक लोन, सरकारी योजनाओं के पूर्ण लाभ और पंचायती राज व्यवस्था के अंतर्गत स्थानीय चुनावों में भाग लेने जैसे मूलभूत अधिकारों से वंचित हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेताया है कि जब तक उन्हें भूमि का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता, उनका संघर्ष अनवरत जारी रहेगा।
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