SDM खुद मरीज बनकर पहुँचीं और पकड़ा फर्जी डॉक्टर; अवैध दवाओं के साथ तमंचा और बारहसिंघा के सींग बरामद

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दिनेशपुर/गदरपुर (21 अप्रैल 2026): ऊधम सिंह नगर जिले के दिनेशपुर थाना क्षेत्र में प्रशासन ने एक बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया है। आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे एक कथित डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया है। इस पूरे ऑपरेशन को गदरपुर की उप जिलाधिकारी (SDM) ऋचा सिंह ने किसी फिल्मी पटकथा की तरह अंजाम दिया।

 SDM बनीं शुगर की मरीज, ऐसे बिछाया जाल

जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया को लंबे समय से शिकायत मिल रही थी कि दिनेशपुर में एक व्यक्ति बिना डिग्री के डॉक्टर बनकर लोगों को आयुर्वेदिक दवा के नाम पर घातक मिश्रण दे रहा है। जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम ऋचा सिंह ने खुद ‘मरीज’ बनकर छापेमारी की योजना बनाई। एसडीएम खुद शुगर (मधुमेह) की मरीज बनकर आरोपी के क्लीनिक पहुँचीं और दवा ली। जांच में पता चला कि वह व्यक्ति आयुर्वेदिक चूर्ण में एलोपैथिक शुगर की गोलियां पीसकर मिला रहा था।

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 भारी मात्रा में दवाइयां और मशीनरी जब्त

पुष्टि होने के बाद पुलिस, जिला आयुर्वेदिक अधिकारी, ड्रग इंस्पेक्टर और जीएसटी विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। मौके से जो बरामद हुआ वह चौंकाने वाला था:

  • दवाइयां: करीब 60 हजार एलोपैथिक शुगर की गोलियां और भारी मात्रा में विटामिन डी की दवाएं।

  • उपकरण: दवाओं को पीसने वाली मशीनें, खाली पैकेट और आयुर्वेदिक दवाओं के रैपर।

  • फर्जीवाड़ा: आरोपी बिना किसी मेडिकल डिग्री के वर्षों से यह अवैध कारोबार चला रहा था।

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‘डॉक्टर’ के पास मिला तमंचा और बारहसिंघा के सींग

छापेमारी के दौरान मामला केवल दवाओं तक सीमित नहीं रहा। आरोपी के पास से एक अवैध तमंचा और दो जिंदा कारतूस भी बरामद हुए हैं। इसके अलावा, मौके से प्रतिबंधित बारहसिंघा के सींग मिलने पर वन विभाग को बुलाया गया, जिसने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अलग से मुकदमा दर्ज किया है।

 विदेशों तक फैला था नेटवर्क

जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि आरोपी अपनी इन मिलावटी दवाओं को न केवल उत्तराखंड और देश के अन्य हिस्सों में, बल्कि विदेशों तक सप्लाई कर रहा था। प्रशासन ने अब तक करीब 100 से 200 ऐसे मरीजों की पहचान की है जो इस दवा का सेवन कर रहे थे।

एसडीएम ऋचा सिंह का बयान:

“आरोपी आयुर्वेदिक दवाओं की आड़ में लोगों को एलोपैथिक सॉल्ट दे रहा था, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। हमने दवा लेने वाले मरीजों से संपर्क कर उन्हें तत्काल सेवन रोकने और सरकारी अस्पताल में जांच कराने की सलाह दी है। जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।”

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