
राजू अनेजा,रुद्रपुर।संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में दिनदहाड़े हुई 2.50 लाख की लूट का पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा कर दिया है। इस वारदात की पटकथा किसी बाहरी गैंग ने नहीं, बल्कि व्यापारी के ही पूर्व कर्मचारी ने लिखी थी। जीआरपी ने मुठभेड़ के बाद चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक बदमाश गोली लगने से घायल है और अस्पताल में भर्ती है।
15 अप्रैल 2026 को ट्रेन संख्या 15036 संपर्क क्रांति एक्सप्रेस के कोच डी-1 में सफर कर रहे रुद्रपुर के कारोबारी मनजीत सिंह गगनेजा के दो कर्मचारी—रीतिक मंडल और साहिब सिंह—से बदमाशों ने हथियारों के बल पर 2 लाख 50 हजार रुपये लूट लिए थे। घटना के बाद रेलवे पुलिस हरकत में आई और केस दर्ज कर ताबड़तोड़ जांच शुरू की।
जीआरपी पुलिस अधीक्षक आशुतोष शुक्ला के मुताबिक, रुद्रपुर से मुरादाबाद तक 400 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। संदिग्धों से पूछताछ के बाद चार लोगों की संलिप्तता सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने जाल बिछाया।
रविवार सुबह जीआरपी रामपुर, बिलासपुर पुलिस और आरपीएफ रुद्रपुर की संयुक्त टीम ने बिलासपुर रेलवे स्टेशन के पास घेराबंदी की। खुद को घिरता देख बदमाशों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में मुख्य आरोपी मिश्रा सिंह (नानकमत्ता) के पैर में गोली लगी, जबकि उसके तीन साथी—गौरव (रामपुरा, रुद्रपुर), गुरदेव उर्फ डेविड (नानकमत्ता) और भारत (रामपुरा, रुद्रपुर)—को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने आरोपियों के पास से 1.38 लाख रुपये, 315 बोर के दो तमंचे, एक जिंदा कारतूस और दो खोखा बरामद किए हैं। फरार पांच अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश जारी है।
पूर्व कर्मचारी निकला मास्टरमाइंड
जांच में खुलासा हुआ कि गौरव, जो पहले मनजीत का कर्मचारी था, उसी ने पूरी लूट की साजिश रची। दो महीने पहले नौकरी छोड़ने के बाद उसने मालिक से 20 हजार रुपये मांगे थे, लेकिन मना करने पर उसने बदला लेने की ठान ली।
कैसे लीक हुई दिल्ली जाने की जानकारी?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि बदमाशों को कर्मचारियों के पास इतनी बड़ी रकम होने और उनके दिल्ली जाने की भनक कैसे लगी। आशंका है कि पुराने संबंधों के चलते गौरव ने ही यह सूचना जुटाई और पूरी वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस खंगालेगी आपराधिक रिकॉर्ड
एसएसपी अजय गणपति ने बताया कि पकड़े गए सभी आरोपियों का आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है। संबंधित थानों को निर्देश दे दिए गए हैं, ताकि पूरे गैंग की जड़ तक पहुंचा जा सके।
ट्रेन में लूट की यह वारदात सिर्फ अपराध नहीं, बल्कि अंदरूनी साजिश का खौफनाक चेहरा है—जहां भरोसा ही सबसे बड़ा हथियार बन गया!
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