किशनपुर गौलापार में श्री राम कथा: भाजपा नेता कमलेश चंदोला ने व्यास पीठ पर पहुंचकर कथा वाचक आचार्य दीपक मिश्रा से लिया आशीर्वाद

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गौलापार/हल्द्वानी: उत्तराखंड के सीमांत और पर्वतीय क्षेत्रों में सनातन संस्कृति के संवर्धन के विधिक व धार्मिक प्रयासों के तहत गौलापार क्षेत्र के किशनपुर स्थित श्री हरि कृष्ण सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में भव्य श्री राम कथा एवं श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। इस पावन और विधिक धार्मिक अनुष्ठान के शुभ अवसर पर क्षेत्र के वरिष्ठ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता कमलेश चंदोला ने कथा स्थल पहुंचकर व्यास पीठ का विधिक पूजन किया। उन्होंने सुप्रसिद्ध कथा वाचक आचार्य श्रीमान दीपक मिश्रा जी को माल्यार्पण कर उनका स्वागत किया और राज्य की सुख-समृद्धि के लिए विधिक आशीर्वाद प्राप्त किया।

आचार्य दीपक मिश्रा के मुखारविंद से कथा रसपान कर रहे श्रद्धालु

धार्मिक आयोजन की विधिक व्यवस्थाओं के अनुसार, इस भव्य ज्ञान यज्ञ में दैनिक रूप से सैकड़ों की संख्या में स्थानीय ग्रामीण और श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे हैं।

  • पावन प्रसंग: कथा वाचक आचार्य श्रीमान दीपक मिश्रा जी के मुखारविंद से प्रवाहित हो रही श्री राम कथा और भागवत प्रसंगों से संपूर्ण क्षेत्र का माहौल भक्तिमय और आध्यात्मिक हो गया है।

  • गरिमामयी उपस्थिति: गौलापार क्षेत्र के सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी की विधिक व पारंपरिक निरंतरता को बनाए रखते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता कमलेश चंदोला ने विधिक रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और व्यास पीठ के प्रति गहरी विधिक व धार्मिक आस्था प्रकट की।

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आयोजन के मुख्य विधिक एवं भौगोलिक बिंदु:

  • स्थान: श्री हरि कृष्ण सरस्वती शिशु मंदिर, किशनपुर, गौलापार (नैनीताल, उत्तराखंड)।

  • धार्मिक प्रसंग: भव्य एवं संगीतमय श्री राम कथा एवं श्रीमद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ।

  • मुख्य व्यास: सुप्रसिद्ध आचार्य श्रीमान दीपक मिश्रा जी।

  • प्रमुख अतिथि: श्री कमलेश चंदोला (वरिष्ठ नेता, भारतीय जनता पार्टी)।

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ग्रामीण क्षेत्रों में सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का संचार

धार्मिक मंच से उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने इस प्रकार के आयोजनों के सामाजिक और विधिक महत्व पर प्रकाश डाला:

  • सांस्कृतिक चेतना का विकास: ऐसे वृहद धार्मिक अनुष्ठानों के विधिक आयोजन से ग्रामीण अंचलों में सनातन संस्कृति, नैतिक मूल्यों और धार्मिक चेतना का प्रभावी संचार होता है, जो युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ता है।

  • सामूहिक एकजुटता: धार्मिक और सामाजिक मंचों पर क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और गणमान्य व्यक्तियों की सक्रिय भागीदारी से समाज में आपसी सामंजस्य, एकजुटता और सकारात्मकता को विधिक रूप से बल मिलता है।

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कथा की विधिक पूर्णाहुति और महाप्रसाद वितरण के विधिक मानकों के अनुरूप मंदिर प्रबंधन और आयोजन समिति द्वारा सुरक्षा व यातायात नियंत्रण के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि सुदूरवर्ती क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की विधिक या व्यावहारिक असुविधा का सामना न करना पड़े।

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