चीमा के गढ़ में चली एसआईआर की कैंची, 27 हजार वोट कटे—आखिर अब किस करवट बैठेगा काशीपुर?

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25 साल से चीमा परिवार के कब्जे में काशीपुर सीट, बदली मतदाता सूची ने बढ़ाई सियासी हलचल

राजू अनेजा, काशीपुर। काशीपुर विधानसभा सीट की राजनीति में एक बार फिर आंकड़ों ने हलचल पैदा कर दी है। करीब 25 वर्षों से चीमा परिवार के प्रभाव वाली इस सीट पर एसआईआर की प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान हजारों नाम हटाए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बदली हुई मतदाता सूची आने वाले विधानसभा चुनाव में काशीपुर की सियासी बिसात को किस करवट ले जाएगी।

2002 से चीमा परिवार की पकड़

काशीपुर विधानसभा सीट पर वर्ष 2002 से लेकर 2022 तक हुए पांच विधानसभा चुनावों में भाजपा का दबदबा कायम रहा। इस दौरान हरभजन सिंह चीमा ने चार में से तीन चुनाव जीते, जबकि 2022 में उनके पुत्र त्रिलोक सिंह चीमा ने भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया।

यानी करीब ढाई दशक से काशीपुर की विधानसभा राजनीति में चीमा परिवार एक प्रमुख राजनीतिक केंद्र बना हुआ है। अब एसआईआर के बाद मतदाता सूची में हुए बड़े बदलाव ने इस स्थापित चुनावी समीकरण को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

1.63 लाख मतदाताओं से शुरू हुआ सफर

एसआईआर से पहले काशीपुर विधानसभा क्षेत्र में कुल 1,63,690 मतदाता पंजीकृत थे। आठ जून से सात जुलाई तक विधानसभा क्षेत्र के करीब 9,500 से अधिक मकानों का सर्वे कराया गया।

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सर्वे के दौरान मृत, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुके, डुप्लीकेट और लंबे समय से अनुपस्थित मतदाताओं को चिह्नित किया गया। जांच के बाद 28,701 नामों का विलोपन किया गया।

इसके बाद मतदाताओं की संख्या घटकर 1,34,989 रह गई।

दावे-आपत्तियों में जुड़े 4,431 नाम

मतदाता सूची को लेकर दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान 4,431 नए मतदाताओं के नाम जोड़े गए। इससे संख्या बढ़कर 1,39,420 हो गई।

इसके बाद तीन से 30 अगस्त तक 11 एआरओ ने बूथवार दावे-आपत्तियों की सुनवाई की। अंतिम प्रकाशन से पहले दोबारा जांच की गई, जिसमें 3,431 नाम और हटाए गए।

इस पूरी प्रक्रिया के बाद अब काशीपुर विधानसभा में 1,35,989 मतदाता रह गए हैं।

असल सवाल 27 हजार वोट कटने का नहीं, कहां से कटे इसका है

राजनीतिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि कटे हुए नाम आखिर किन इलाकों और बूथों से हैं?

कुल मतदाताओं की संख्या में कमी निश्चित रूप से बड़ी है, लेकिन चुनावी रणनीति के लिहाज से बूथवार आंकड़े इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण होंगे। यदि किसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में डुप्लीकेट या शिफ्टेड मतदाता थे तो उनका नाम हटना स्वाभाविक प्रशासनिक प्रक्रिया है।

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लेकिन राजनीतिक दलों के लिए अब यह जानना महत्वपूर्ण होगा कि किस बूथ पर कितने नाम घटे, कहां नए मतदाता जुड़े और किस क्षेत्र में मतदाता संरचना बदली।

चीमा परिवार के गढ़ में नए आंकड़ों की चुनौती

काशीपुर की राजनीति में चीमा परिवार की लंबी चुनावी पकड़ के बीच एसआईआर ने मतदाता सूची के आंकड़ों को बदल दिया है। अब राजनीतिक दलों को पुराने चुनावी आंकड़ों के साथ नई मतदाता सूची का मिलान करना होगा।

किस बूथ पर कितने वोट कम हुए? किस वार्ड में मतदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा बदली? नए जुड़े मतदाता किन इलाकों से हैं? ऐसे तमाम सवाल अब राजनीतिक रणनीतिकारों के सामने होंगे।

पुराने चुनावी रिकॉर्ड भी कम दिलचस्प नहीं

काशीपुर सीट पर वर्ष 2002 का चुनाव बेहद करीबी रहा था। इसके बाद चीमा परिवार ने कई चुनावों में बड़े अंतर से जीत दर्ज की। 2017 में हरभजन सिंह चीमा ने बड़ी बढ़त से जीत हासिल की, जबकि 2022 में त्रिलोक सिंह चीमा ने भी सीट पर भाजपा का कब्जा बरकरार रखा।

यानी काशीपुर में पिछले ढाई दशक की चुनावी कहानी में चीमा परिवार की निरंतर मौजूदगी एक महत्वपूर्ण तथ्य है।

अब एसआईआर के बाद बदली मतदाता सूची ने इस पुराने राजनीतिक समीकरण पर नई चर्चा को जन्म दिया है।

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पुरानी जमीन, नए आंकड़े और 2027 की तैयारी

अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि एसआईआर के बाद किस दल या प्रत्याशी को राजनीतिक लाभ होगा। सिर्फ वोट कटने से किसी एक पक्ष के पक्ष में चुनावी नतीजे का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

लेकिन इतना जरूर है कि काशीपुर की चुनावी राजनीति अब पुराने आंकड़ों के बजाय नई मतदाता सूची के आधार पर रणनीति बनाने के दौर में प्रवेश कर चुकी है।

अब बूथों पर टिकेगी असली नजर

अंतिम सूची में 71,313 पुरुष, 64,674 महिला और दो थर्ड जेंडर मतदाता हैं। आने वाले समय में राजनीतिक दलों की नजर इन आंकड़ों के साथ-साथ बूथवार बदलाव पर रहेगी।

25 साल से चीमा परिवार के प्रभाव वाली काशीपुर सीट पर अब एसआईआर की कैंची ने मतदाता सूची का बड़ा हिस्सा बदल दिया है। सवाल यही है—पुरानी सियासी पकड़ कायम रहती है या बदले हुए मतदाता आंकड़े चुनावी रणनीति को नई दिशा देते हैं?

इसका जवाब चुनाव के समय सामने आएगा, लेकिन काशीपुर की चुनावी बिसात पर एसआईआर ने नए आंकड़े जरूर रख दिए हैं।

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