चंपावत: 10वीं की छात्रा से दुष्कर्म का मामला निकला सोची-समझी साजिश; पुरानी रंजिश में कमल रावत ने रचा था खेल
चंपावत के सल्ली क्षेत्र में 10वीं की छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म की सनसनीखेज शिकायत पुलिस जांच में एक गहरा षडयंत्र साबित हुई है। जिलाधिकारी मनीष कुमार की अध्यक्षता में मामले का पर्दाफाश करते हुए पुलिस अधीक्षक रेखा यादव ने बताया कि मुख्य आरोपी कमल रावत ने पुरानी रंजिश का बदला लेने के लिए अपनी महिला मित्र और अन्य साथियों के साथ मिलकर इस पूरी घटना की साजिश रची थी। आरोपी कमल ने पीड़िता को उसके बीमार पिता का एम्स (AIIMS) में मुफ्त इलाज कराने का लालच देकर अपने जाल में फंसाया और उसे इस झूठे नाटक का हिस्सा बनने के लिए राजी कर लिया। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और उससे कड़ी पूछताछ की जा रही है।
वैज्ञानिक साक्ष्यों और सीसीटीवी ने खोली पोल
पुलिस जांच के दौरान एसआईटी (SIT) और आरएफएसएल (RFSL) की टीम को घटनास्थल पर संघर्ष या जबरदस्ती के कोई निशान नहीं मिले। मेडिकल रिपोर्ट में भी पीड़िता के शरीर पर किसी भी प्रकार की आंतरिक या बाहरी चोट की पुष्टि नहीं हुई। जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाले, तो पता चला कि पीड़िता अपनी मर्जी से विवाह समारोह में गई थी। सीडीआर विश्लेषण से यह भी स्पष्ट हुआ कि पीड़िता के मोबाइल पर सबसे ज्यादा बातचीत मुख्य साजिशकर्ता कमल रावत से हुई थी। पीड़िता ने बाद में मजिस्ट्रेट और सीडब्ल्यूसी (CWC) के समक्ष स्वीकार किया कि उसने कमल के प्रलोभन में आकर दुष्कर्म का झूठा माहौल बनाया और वीडियो तैयार की थी।
पुरानी रंजिश बनी साजिश की वजह
पुलिस के अनुसार, कमल रावत पूर्व में भी इसी तरह के एक मामले में जेल जा चुका था, जहाँ उसे हाईकोर्ट से राहत मिली थी। जेल से छूटने के बाद से ही वह विपक्षी परिवार के प्रति मन में रंजिश पाले हुए था और उन्हें फंसाने के लिए मौके की तलाश में था। इसी बदले की भावना से उसने इस घिनौने षडयंत्र को अंजाम दिया। एसपी रेखा यादव ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए 10 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था, जिसकी त्वरित और वैज्ञानिक जांच के कारण महज 24 घंटों के भीतर दूध का दूध और पानी का पानी हो गया।
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