उधम सिंह नगर : न्याय के तराजू में रिहाई का पलड़ा भारी! पाॅस्को सहित गंभीर मामलों में जांच, गवाह और पैरवी की कमजोर कड़ियां बढ़ा रही हैं बरी होने के मामले

RTI से खुलासा : पाॅस्को के 79% और गंभीर अपराधों के 69% मामलों में आरोपित बरी, सजा दर पर उठे सवाल
राजू अनेजा,काशीपुर। उधम सिंह नगर में अपराधियों को सजा दिलाने की लड़ाई में पुलिस जांच, गवाहों के मुकरने और अभियोजन की कमजोर पैरवी बड़ी चुनौती बनती दिखाई दे रही है। यही वजह है कि वर्ष 2025 में पाॅस्को और हत्या, लूट, डकैती व दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराधों के मामलों में सजा का प्रतिशत बेहद कम रहा, जबकि बड़ी संख्या में आरोपित अदालतों से बरी हो गए। सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत प्राप्त आंकड़ों ने जिले की आपराधिक न्याय प्रणाली की कई कमजोर कड़ियों को उजागर कर दिया है।
आरटीआई में सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर
काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता नदीम उद्दीन ने अभियोजन निदेशालय से वर्ष 2025 में सजा और रिहाई से संबंधित आंकड़ों की जानकारी मांगी थी। संयुक्त निदेशक अभियोजन कार्यालय, उधम सिंह नगर द्वारा उपलब्ध कराई गई सूचना के अनुसार वर्ष 2025 में जिले की अदालतों ने कुल 9165 आपराधिक मामलों का निस्तारण किया।
आंकड़े बताते हैं कि कई श्रेणियों में सजा का प्रतिशत संतोषजनक नहीं रहा, जबकि रिहाई के मामलों की संख्या चिंताजनक रूप से अधिक रही।
पाॅस्को मामलों में केवल 21 प्रतिशत को सजा
सबसे गंभीर स्थिति बच्चों के यौन उत्पीड़न से जुड़े पाॅस्को मामलों में सामने आई है। विशेष पाॅस्को न्यायालय ने वर्ष 2025 में 141 मामलों का निस्तारण किया। इनमें केवल 27 मामलों में दोष सिद्ध होने पर सजा हुई, जबकि 99 मामलों में आरोपित बरी हो गए। 15 मामलों को दाखिल दफ्तर या क्वैश किया गया।
यानी पाॅस्को अदालत में सजा का प्रतिशत महज 21 प्रतिशत रहा, जबकि लगभग 79 प्रतिशत मामलों में अभियोजन आरोप साबित नहीं कर सका।
हत्या, लूट और दुष्कर्म जैसे मामलों में भी निराशाजनक स्थिति
सत्र न्यायालयों में विचारणीय हत्या, लूट, डकैती, दुष्कर्म और अन्य गंभीर अपराधों के 150 मामलों का निस्तारण हुआ। इनमें सिर्फ 40 मामलों में सजा हुई, जबकि 91 मामलों में आरोपित बरी हो गए। 19 मामलों का निस्तारण क्वैश या दाखिल दफ्तर के रूप में हुआ।
इन मामलों में सजा का प्रतिशत केवल 31 प्रतिशत रहा। यानी हर तीन मामलों में से दो में अभियोजन अदालत में आरोप सिद्ध नहीं करा सका।
कहां कमजोर पड़ रही है न्याय व्यवस्था की कड़ी?
कानूनी जानकारों का मानना है कि गंभीर अपराधों में कम सजा दर के पीछे कई कारण हो सकते हैं। घटनास्थल से पर्याप्त वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं जुट पाना, गवाहों का मुकर जाना, जांच में तकनीकी खामियां, समय पर चार्जशीट दाखिल न होना और अदालत में प्रभावी पैरवी का अभाव ऐसे प्रमुख कारण हैं जो मामलों को कमजोर कर देते हैं।
हालांकि यह कहना उचित नहीं होगा कि हर मामले में केवल पुलिस या अभियोजन की ही गलती रही हो। कई बार शिकायतकर्ता और गवाह भी अदालत में अपने बयान बदल देते हैं, जिससे मामला कमजोर पड़ जाता है।
एनडीपीएस मामलों में बेहतर प्रदर्शन
नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष एनडीपीएस अदालत का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा। वर्ष 2025 में 117 मामलों का निस्तारण हुआ, जिनमें 73 मामलों में सजा और 14 मामलों में रिहाई हुई। इन मामलों में सजा का प्रतिशत 84 प्रतिशत दर्ज किया गया।
यह दर्शाता है कि जहां साक्ष्य मजबूत और जांच व्यवस्थित होती है, वहां दोष सिद्ध होने की संभावना भी बढ़ जाती है।
लंबित मामलों का बढ़ता बोझ भी चिंता का विषय
आरटीआई से यह भी खुलासा हुआ है कि जिले के सत्र न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2025 की शुरुआत में 3465 मामले लंबित थे। वर्ष के दौरान 1021 नए मामले दर्ज हुए और वर्ष के अंत तक लंबित मामलों की संख्या बढ़कर 3794 हो गई।
हालांकि अधीनस्थ न्यायालयों में कुछ राहत देखने को मिली, जहां लंबित मामलों की संख्या 30716 से घटकर 27246 रह गई।
अन्य विशेष अदालतों की स्थिति भी मिली-जुली
विशेष एससी-एसटी न्यायालय में वर्ष 2025 के दौरान 14 मामलों का निस्तारण हुआ, जिनमें केवल दो मामलों में सजा हुई। गैंगस्टर अदालत में पांच मामलों में से एक में सजा हुई। वहीं फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (एफटीएससी) में 40 मामलों का निस्तारण होने के बावजूद मात्र दो मामलों में दोष सिद्ध हो सका।
नदीम उद्दीन बोले— आंकड़े चिंतन का विषय
आरटीआई कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता नदीम उद्दीन का कहना है कि अपराधियों को सजा दिलाने की प्रक्रिया तभी मजबूत होगी जब जांच एजेंसियां, गवाह संरक्षण तंत्र और अभियोजन व्यवस्था समान रूप से मजबूत हों। उनका कहना है कि पाॅस्को और गंभीर अपराधों में कम सजा दर समाज और न्याय व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
एक नजर में आंकड़े
पाॅस्को न्यायालय
कुल निस्तारित मामले : 141
सजा : 27
रिहाई : 99
सजा प्रतिशत : 21%
गंभीर अपराध (हत्या, लूट, दुष्कर्म आदि)
कुल निस्तारित मामले : 150
सजा : 40
रिहाई : 91
सजा प्रतिशत : 31%
एनडीपीएस न्यायालय
कुल निस्तारित मामले : 117
सजा : 73
रिहाई : 14
सजा प्रतिशत : 84%
सवाल बरकरार…
उधम सिंह नगर की अदालतों से सामने आए ये आंकड़े कई सवाल खड़े कर रहे हैं। यदि गंभीर अपराधों और पाॅस्को जैसे संवेदनशील मामलों में बड़ी संख्या में आरोपित बरी हो रहे हैं, तो क्या जांच, साक्ष्य संकलन, गवाहों की सुरक्षा और अभियोजन की रणनीति पर नए सिरे से मंथन की जरूरत है? न्याय व्यवस्था के सामने यही सबसे बड़ा प्रश्न बनकर उभरा है।
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