देहरादून: उत्तराखंड में उपनल (UPNL) कर्मचारियों के नियमितीकरण के मामले में धामी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा दायर रिव्यू पिटीशन को खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद, सरकार पर अब उपनल कर्मचारियों को नियमित किए जाने के लिए जल्द से जल्द फैसला लेने का दबाव बढ़ गया है।
🏛️ न्यायालय से सरकार को निराशा
| चरण | विवरण | परिणाम |
| हाईकोर्ट का निर्देश | उपनल कर्मचारियों को ‘समान कार्य के बदले समान वेतन’ देने और उनके नियमितीकरण के लिए नियमावली बनाने का निर्देश दिया गया था। | कर्मचारियों के पक्ष में |
| सुप्रीम कोर्ट (पहला) | राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ SLP (स्पेशल लीव पिटीशन) दायर की थी। | खारिज |
| सुप्रीम कोर्ट (दूसरा) | राज्य सरकार ने SLP खारिज होने के बाद रिव्यू पिटीशन दाखिल की। | खारिज |
सुप्रीम कोर्ट से एक बार फिर राहत न मिलने के बाद धामी सरकार अब उपनल कर्मियों के नियमितीकरण के मामले में बैकफुट पर आ गई है।
🤝 कर्मचारियों का आंदोलन और मांग
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सड़क पर विरोध: उपनल कर्मचारी पिछले कई दिनों से सड़कों पर हैं और नियमितीकरण की मांग के साथ सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। राज्य स्थापना दिवस (9 नवंबर) के ठीक बाद ही कर्मचारी सड़कों पर उतर आए थे।
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अवमानना याचिका: हाईकोर्ट पहले ही नियमावली बनाने के निर्देश दे चुका है, और ऐसा नहीं होने की स्थिति में उपनल कर्मी अवमानना याचिका लगा चुके हैं।
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ठोस नीति की मांग: विद्युत संविदा कर्मचारी संघ के अध्यक्ष विनोद कवि (जिनके मामले में समान वेतन लागू हुआ था) ने कहा है कि सरकार को हाईकोर्ट के निर्देशों के क्रम में नियमितीकरण का जल्द फैसला करना चाहिए।
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कैबिनेट फैसला खारिज: कर्मचारियों ने कैबिनेट में मंत्रिमंडलीय समिति बनाए जाने के फैसले को भी नाकाफी बताते हुए कहा है कि केवल ठोस नीति लागू करने से ही उनका विरोध रुकेगा।

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