उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027: भाजपा और कांग्रेस ने सर्वे के जरिए शुरू की बिसात; 60 पार बनाम 50 पार की जंग
उत्तराखंड में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए अभी से सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल और असम में मिली जीत से उत्साहित भाजपा जहाँ राज्य में सत्ता की ‘हैट्रिक’ लगाने का लक्ष्य लेकर चल रही है, वहीं पिछले 10 साल से सत्ता से बाहर कांग्रेस वापसी के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रही है। दोनों ही प्रमुख दल वर्तमान में अपनी स्थिति और जनता की नब्ज टटोलने के लिए सर्वे का सहारा ले रहे हैं। भाजपा अब तक दो दौर के सर्वे पूरे कर चुकी है, जबकि कांग्रेस भी अपने गुप्त और आंतरिक सर्वे के जरिए कमजोर सीटों को चिह्नित करने में जुटी है।
भाजपा और कांग्रेस की चुनावी रणनीतियां:
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भाजपा का लक्ष्य ’60 पार’: भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान के अनुसार, पार्टी ने उन सीटों के लिए अलग रणनीति बनाई है जहाँ वह 2022 में हार गई थी या जहाँ कभी जीत हासिल नहीं हुई। भाजपा सर्वे के माध्यम से अपने मौजूदा विधायकों की साख और लाभार्थियों तक पहुंच की समीक्षा कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पार्टी 60 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
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कांग्रेस का लक्ष्य ’50 पार’: कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने बताया कि पार्टी आलाकमान अपने स्तर पर गुप्त सर्वे करा रहा है। कांग्रेस ने सीटों को श्रेणियों में बांटा है— जहाँ जीत मिली थी, जहाँ कम मार्जिन से हारे और जहाँ बड़े मार्जिन से हार मिली। 15 जून के बाद पार्टी अपनी चुनावी रणनीति को और धार देगी।
जहाँ भाजपा अपने संगठन के दो दिवसीय प्रशिक्षण और सर्वे रिपोर्ट की समीक्षा में व्यस्त है, वहीं कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा भी कार्यकर्ताओं में जोश भरने के लिए प्रदेश दौरे पर हैं। दोनों ही दलों के लिए यह चुनाव ‘नाक और साख’ का सवाल बन गया है। अब देखना यह होगा कि सर्वे से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर कौन सा दल जनता का विश्वास जीतने में सफल रहता है।
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