उत्तराखंड 2027 बिगुल: लालकुआं में बिष्ट, दुमका और चंदौला के त्रिकोण में फंसा भाजपा टिकट का गणित

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लालकुआं/देहरादून: उत्तराखंड में आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव का सियासी बिगुल पूरी तरह से बज चुका है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में “मिशन 60” के विधिक संकल्प के साथ चुनावी समर में उतर चुकी है। इसके लिए पार्टी ने राज्य की सभी 70 विधानसभा सीटों और करीब 11 हजार बूथों पर अपनी माइक्रो-प्लानिंग व सांगठनिक घेराबंदी शुरू कर दी है, जिसमें राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के तूफानी दौरों ने कार्यकर्ताओं में अभूतपूर्व जोश भर दिया है।

इस बीच, नैनीताल जिले की सबसे चर्चित लालकुआं विधानसभा सीट पर आगामी चुनाव में भाजपा किस चेहरे पर दांव खेलेगी, इसे लेकर सियासी बाजार बेहद गर्म है। पार्टी का यह विधिक निर्णय पूरी तरह से तत्कालीन खुफिया सर्वे रिपोर्ट, स्थानीय सामाजिक समीकरण और सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इन्कंबेंसी) को थामने की रणनीति पर निर्भर करेगा।

लालकुआं सीट का राजनीतिक इतिहास और ‘चेहरा बदलने का ट्रेंड’

वर्तमान में इस सीट से भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. मोहन सिंह बिष्ट विधायक हैं, जिन्होंने पिछले 2022 के विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत को 17,527 वोटों के प्रचंड विधिक अंतर से शिकस्त दी थी।

हालांकि, लालकुआं सीट के गठन (वर्ष 2012) के बाद से यहाँ का एक अनोखा राजनीतिक स्वभाव रहा है। यहाँ के मतदाताओं ने हर चुनाव में नया चेहरा चुना है:

  • 2012: निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में हरीश दुर्गापाल विजयी हुए।

  • 2017: भाजपा के टिकट पर नवीन चंद्र दुमका ने परचम लहराया।

  • 2022: भाजपा के डॉ. मोहन सिंह बिष्ट ने जीत दर्ज की।

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इस स्थापित ट्रेंड को तोड़ना और सीट पर दोबारा कमल खिलाना भाजपा संगठन के लिए एक बड़ी विधिक चुनौती साबित होने वाला है।

टिकट की दौड़ में शामिल प्रमुख दावेदार और उनके विधिक समीकरण

1. डॉ. मोहन सिंह बिष्ट (वर्तमान विधायक):

वर्तमान विधायक होने के नाते डॉ. बिष्ट टिकट की विधिक दौड़ में सबसे आगे और स्वाभाविक दावेदार माने जा रहे हैं। वर्ष 2022 में हरीश रावत जैसी कद्दावर राजनीतिक शख्सियत को हराने के कारण भाजपा आलाकमान और केंद्रीय नेतृत्व में उनकी साख बेहद मजबूत है। यदि आगामी महीनों में उनके कार्यकाल के खिलाफ कोई बड़ा स्थानीय विरोध या नकारात्मक फीडबैक नहीं उभरता है, तो पार्टी उनके नाम पर दोबारा विधिक मुहर लगा सकती है।

2. कमलेश चंदौला (सक्रिय सामाजिक एवं सांगठनिक चेहरा):

लालकुआं क्षेत्र के अंतर्गत राज्य के सबसे बड़े गांव बिंदुखत्ता सहित स्थानीय युवाओं के रोजगार और सुनियोजित विकास को लेकर क्षेत्र में लंबे समय से नए और युवा नेतृत्व की मांग उठती रही है। इसी क्रम में भाजपा संगठन के जिला स्तरीय पदाधिकारी और प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता कमलेश चंदौला जमीन पर अपनी दावेदारी को बेहद मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।

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कमलेश चंदौला पिछले कई वर्षों से क्षेत्र की जनता के बीच सक्रिय हैं और वन अधिकार समिति को सहयोग करने सहित राजस्व भूमि से जुड़े गंभीर जनहित के मामलों को लेकर स्थानीय स्तर पर प्रखरता से आवाज बुलंद करते रहे हैं। उत्तराखंड के सामाजिक सरोकारों में अग्रणी रहने वाले चंदौला ने कोरोना काल (कोविड-19 महामारी) के भीषण संकट के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर असहायों, जरूरतमंदों और प्रवासी मजदूरों की जो निस्वार्थ सेवा, भोजन वितरण और विधिक सहायता की थी, उसे स्थानीय समाज में आज भी एक अनुकरणीय मिसाल माना जाता है। वे अपने निजी संसाधनों और समय को सांगठनिक कार्यक्रमों में समर्पित कर रहे हैं, ताकि पार्टी के आंतरिक सर्वे और निष्ठा के आधार पर वर्ष 2027 में आलाकमान उनके नाम पर विधिक विचार कर सके।

3. नवीन चंद्र दुमका (पूर्व विधायक):

भाजपा के वरिष्ठ और कद्दावर नेता नवीन चंद्र दुमका ने वर्ष 2017 के चुनाव में कांग्रेस के हरीश चंद्र दुर्गापाल को भारी मतों से हराकर इस सीट पर पहली बार कमल खिलाया था। भले ही वर्ष 2022 के चुनाव में पार्टी ने उनका टिकट काट दिया था, लेकिन क्षेत्र के सांगठनिक ढांचे, कार्यकर्ताओं और आम मतदाताओं के बीच उनकी जमीनी पकड़ आज भी उतनी ही मजबूत मानी जाती है। ऐसे में वे हर परिस्थिति में पार्टी के लिए हमेशा एक बेहद मजबूत और विधिक विकल्प के रूप में स्थापित हैं।

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फरवरी 2027 में प्रस्तावित हैं चुनाव; खुफिया सर्वे बनेगा आधार

चूंकि उत्तराखंड विधानसभा के मुख्य चुनाव फरवरी 2027 में प्रस्तावित हैं, इसलिए भाजपा इस बेहद महत्वपूर्ण ‘हॉट सीट’ पर किसी भी प्रकार की आंतरिक गुटबाजी या असंतोष से बचने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रही है। पार्टी के रणनीतिकारों के अनुसार, अंतिम समय में खुफिया एजेंसियों के गुप्त सर्वे, बूथ स्तर से प्राप्त होने वाले विधिक फीडबैक और केंद्रीय संसदीय बोर्ड की संस्तुति के आधार पर ही लालकुआं सीट के लिए प्रत्याशी के नाम की आधिकारिक व विधिक घोषणा की जाएगी।