कहां है काशीपुर का व्यापार मंडल… कहां है व्यापारियों की आवाज? जीएसटी कार्रवाई के बाद व्यापारियों में उबाल

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“रुद्रपुर-हल्द्वानी में एक आवाज पर बाजार एकजुट हो जाता है, काशीपुर में हमारी आवाज बनने वाला कौन?”

 

व्यापारियों का सवाल—कभी जीएसटी, कभी खाद्य, कभी बिजली तो कभी श्रम विभाग की कार्रवाई; मुश्किल वक्त में नेतृत्व क्यों नजर नहीं आता?

 

राजू अनेजा, काशीपुर।काशीपुर में शनिवार को इलेक्ट्रिकल्स कारोबारियों के प्रतिष्ठानों और गोदामों पर हुई जीएसटी विभाग की कार्रवाई ने व्यापारियों के बीच सिर्फ आक्रोश ही नहीं पैदा किया, बल्कि शहर के व्यापारिक नेतृत्व की भूमिका पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

अचानक हुई कार्रवाई से दिनभर व्यापारियों में खलबली मची रही। शाम को कई कारोबारियों ने अपनी दुकानें बंद कर एमपी चौक पर पहुंचकर जीएसटी विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया। लेकिन प्रदर्शन के बीच व्यापारियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि आखिर मुश्किल समय में व्यापारियों की सामूहिक आवाज बनने वाला नेतृत्व कहां है?

“रुद्रपुर-हल्द्वानी में एक आवाज पर बाजार एकजुट, काशीपुर में आवाज उठाने वाला कौन?”

 

कई व्यापारियों का कहना है कि रुद्रपुर और हल्द्वानी जैसे बड़े शहरों में जब व्यापारियों के हित से जुड़ा कोई मुद्दा सामने आता है तो एक आवाज पर व्यापारी संगठित होकर अपनी ताकत दिखाते हैं। वहां व्यापारियों की समस्याओं को लेकर नेतृत्व अधिकारियों के सामने मजबूती से अपनी बात रखता दिखाई देता है।

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इसके उलट काशीपुर के व्यापारियों का कहना है कि यहां व्यापारियों की आवाज को एकजुट कर विभागों के सामने रखने वाला मजबूत नेतृत्व नजर नहीं आता।

एक व्यापारी ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब कोई विभागीय कार्रवाई होती है तो व्यापारी अपने-अपने स्तर पर अधिकारियों के सामने खड़े दिखाई देते हैं। आखिर व्यापार मंडल का मतलब क्या सिर्फ संगठन और पदाधिकारियों तक सीमित रह गया है या मुश्किल वक्त में व्यापारियों के साथ खड़े होने की जिम्मेदारी भी उसकी है?

 

कभी जीएसटी… कभी खाद्य… कभी बिजली… व्यापारी आखिर जाए तो जाए कहां?

व्यापारियों का कहना है कि परेशानी सिर्फ जीएसटी विभाग तक सीमित नहीं है। कभी खाद्य विभाग, कभी जीएसटी, कभी बिजली विभाग, कभी श्रम विभाग तो कभी आयकर विभाग की कार्रवाई को लेकर व्यापारी परेशान रहते हैं।

व्यापारियों का कहना है कि महंगाई के दौर में पहले ही व्यापार चलाना आसान नहीं है। किराया, बिजली, कर्मचारियों का खर्च, माल की बढ़ती कीमत और अन्य खर्चों के बीच कारोबारी किसी तरह अपना व्यवसाय चला रहे हैं। ऊपर से विभिन्न विभागों की कार्रवाई का दबाव छोटे और मध्यम व्यापारियों की मुश्किलें और बढ़ा रहा है।

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“टैक्स भी दो और हर वक्त कटघरे में भी खड़े रहो?”

 

व्यापारियों का कहना है कि वे सरकार को जीएसटी समेत विभिन्न करों का भुगतान कर रहे हैं। यदि किसी व्यापारी के रिकॉर्ड में कोई कमी या नियमों का उल्लंघन है तो नियमानुसार जांच और कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन व्यापारियों को कहना है कि कार्रवाई के दौरान उनकी बात और व्यावहारिक परेशानियों को भी सुना जाना चाहिए।

उनका सवाल है कि जब व्यापारी सरकार को राजस्व दे रहा है और तमाम आर्थिक दबावों के बीच कारोबार चला रहा है तो उसकी समस्याओं को सामने रखने की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा?

 

दीपावली सिर पर… और व्यापारियों में बढ़ रही बेचैनी

दीपावली का त्योहार नजदीक है। इलेक्ट्रिकल्स कारोबारियों के लिए यह महत्वपूर्ण कारोबारी सीजन है। ऐसे समय में अचानक हुई विभागीय कार्रवाई ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है।

व्यापारियों का कहना है कि उन्हें विभागों से टकराव नहीं चाहिए, बल्कि निष्पक्ष कार्रवाई, स्पष्ट नियम और अपनी बात रखने का उचित अवसर चाहिए। इसके लिए उन्हें ऐसे व्यापारिक नेतृत्व की जरूरत है जो अधिकारियों के सामने व्यापारियों की समस्याओं को मजबूती से रख सके।

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“मुश्किल वक्त में साथ कौन खड़ा होगा?”

 

जीएसटी कार्रवाई के बाद अब काशीपुर के व्यापारिक गलियारों में सिर्फ विभागीय कार्रवाई की चर्चा नहीं है। उससे बड़ा सवाल व्यापार मंडल की सक्रियता और व्यापारियों की एकजुटता को लेकर खड़ा हो गया है।

व्यापारियों का कहना है कि रुद्रपुर और हल्द्वानी में यदि एक आवाज पर बाजार एकजुट हो सकता है तो काशीपुर में ऐसा क्यों नहीं? आखिर यहां वह आवाज कहां है जो व्यापारियों की आवाज बनकर विभागों के सामने उनकी बात रख सके?

अब सवाल सिर्फ जीएसटी कार्रवाई का नहीं, बल्कि काशीपुर के व्यापारिक नेतृत्व की भूमिका का भी है।

“विभाग अपनी कार्रवाई कर रहे हैं… व्यापारी अपना संघर्ष कर रहे हैं… लेकिन व्यापारियों की सामूहिक आवाज कौन बनेगा?”

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