चरस तस्करी पर लगाम लगाने के लिए जिलाधिकारी ने खुद उखाड़े भांग के पौधे

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पिथौरागढ़. सीमांत जिले पिथौरागढ़ में चरस तस्करी पर लगाम लगाने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है. शहर से लगे ग्रामीण इलाकों में भांग की अवैध खेती को नष्ट किया जा रहा है.

दरअसल जिले में युवाओं का नशे के प्रति बढ़ते रुझानों की लगातार शिकायतों के चलते जिलाधिकारी डॉ आशीष चौहान की पहल पर जिला प्रशासन भांग की खेती करने वाले इलाकों में इसे नष्ट कर रहा है. खुद जिलाधिकारी भी भांग की खेती को नष्ट करने के लिए अपनी टीम के साथ खेतों में पहुंच रहे हैं.

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डीएम आशीष चौहान ने बताया कि जिले में भांग के पौधे का इस्तेमाल चरस के लिए बढ़ रहा है, जिसकी शिकायतें लगातार मिलती आई हैं. इसका समाज पर दुष्प्रभाव बढ़ते ही जा रहा है और चरस तस्करी के मामले भी ज्यादा देखे गए हैं. ऐसे में भांग की खेती से चरस बनाकर इस्तेमाल करने वाले इलाकों में इसे नष्ट करा जा रहा है.

इन इलाकों में चली प्रशासन की कार्रवाई

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जिला प्रशासन और पिथौरागढ़ पुलिस की टीम ने नगर से लगे ग्रामीण क्षेत्र चंडाक और बिलाई में भांग की खेती को नष्ट किया है, जो चरस तस्करी पर लगाम लगाने का एक प्रयास है. हालांकि दूसरी तरफ ग्रामीण परिवेश की ज्यादातर आबादी भांग की खेती कर रोजगार से भी जुड़ी है. यहां भांग के बीजों की काफी डिमांड रहती है, जो बाजार में 200 रुपये किलो बिक रहा है.

वहीं भांग के पौधों से निकलने वाले रेशे से यहां रस्सियां बनाई जाती हैं. यह कारोबार यहां के लोग पीढ़ी दर पीढ़ी करते आए हैं. अब भांग की खेती नष्ट होने से कहीं न कहीं इससे जुड़े लोगों पर फर्क पड़ेगा और बाजार में भांग के बीज भी मुश्किल से मिलेंगे. इस विषय पर यहां स्थानीय लोगों ने चिंता भी जाहिर की है.

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