नशे के गर्त में बरबाद हो रही है नई पीढ़ी, मूकदर्शक बने समाजसेवी

नशे के चलते अपराध की दलदल में फंस रहे है युवा

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विपिन जोशी, लालकुआ : स्मैक, एक ऐसा नशा जिसकी जकड़ में अगर कोई आ गया तो बाहर निकलना मुश्किल है। वर्तमान समय में स्मैक गांव की गलियों तक पहुंच गया है, परिणाम स्वरूप नई पीढ़ी नशे की गर्त में डूबती जा रही है और कथित समाज प्रहरी मूकदर्शक बन कर नस्लों को बरबाद होते हुए देख हे है, यही कारण है कि पुलिस भी इस भयानक नशे से समाज को बचाने के लिए कोई ठोस प्रयास नही कर रही है।
वर्तमान में समाज में स्मैक का बढ़ता प्रकोप भयानक समस्या के रूप में सामने आने लगा है, कुछ लोग चंद पैसों के लिए नई पीढ़ी को स्मैक कारोबार के कारोबार में धेकेल रहे है, गांव की गलियों तक स्मैक आसानी से उपलब्ध हो जा रही है। बताया जा रहा है कि बहेड़ी, मुरादाबाद व किच्छा से स्मैक लाकर यहां के छोटे तस्करों को उपलब्ध कराई जाती है। ऐसा नहीं है कि पुलिस कोकारोबारियों व स्मैक के अड्डों की जानकारी नहीं है , लेकिन तस्करों के मजबूत नैटवर्क के चलते वह पुलिस के पहुंचने के पहले ही गायब हो जाते है।

टारगेट पर नई पीढ़ी

= गुप्तचर विभाग के अनुसार स्मैक तस्कर नई पीढ़ी यानी 17 से 25 साल के युवाओं को निशाना बना रहे हैं । इसके अलावा प्राईवेट स्कूलों के बच्चे भी इनके निशाने पर है। क्योंकि उनके अभिभावक उन्हें बिना पूछे जेब खर्च दे देते है। जबकि सरकार स्कूलों के बच्चों को फीस देने को बमुश्किल पैसा मिलता है । पता चला है कि एक ग्राम स्मैक में करीब 30 बिट बनती है। एक बिट की कीमत दो से ढाई सौ रुपया है। नए नशेड़ी को एक बिट का नशा तीन से चार घंटे रहता है जबकि पुराने नशेड़ी को तीन से चार बिट की जरूरत पड़ती है।

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स्मैक के प्रति समाजसेवी बेफिक्र

= लालकुआ क्षेत्र में समाज सेवा करने का ढ़ोंग करने वाले लोग नस्लों को बरवाद करती स्मैक के प्रति संवेदनहीन बने हुए है । इस और किसी भी समाजसेवी व एनजीओ का ध्यान नहीं है। यही नही परिजन भी इस खतरनाक नशे से अपने बच्चों को बचाने के लिए कोई ठोस प्रयास नही कर रहे है, क्षेत्र के साथ ही जिले में बढ़ते इस अपराध को रोकना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर बनता जा है।

टूटन के नाम से प्रचलित है स्मैक

लालकुआ : परिजनों व अन्य लोगों के सामने स्मैक का नाम लेना खतरे से खाली नहीं है । इसलिए स्मैक तस्करों व इसे इस्तेमाल करने वाले युवाओं ने स्मैक का उपनाम टूटन रखा है । ताकि परिजनों व अन्य लोगों के सामने कोर्ड वर्ड में बात कर इसके बारे में पूछ सकता है।

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स्मैक के लिए कर रहे अपराध
— स्मैक का नशा स्कूली व बेरोजगार युवाओं के लिए काफी महंगा नशा है। जिसकारण वह स्मैक के लिए पहले घर में फिर बाहर चोरी व अन्य वारदातों को अंजाम देते है। यही नही कई नशेड़ी परिजनों को तमाम धमकी देकर व इमोशनल ब्लैकमेल कर पैसे लेकर स्मैक पीते है। वर्तमान समय मे कोतवाली क्षेत्र से करीब दो दर्जन युवा नशा मुक्ति केंद्र में अपना उपचार करा रहे है। परंतु स्मैक के आसानी से उपलब्ध होने के कारण घर आने के बाद अधिकतर युवा फिर से स्मैक का सेवन करने लगते है।

घटना नंबर एक
कुछ दिन पूर्व हल्दूचौड़ के एक युवक ने स्मैक के लिए बैंक ऑफ बड़ोदा के सामने खड़ी स्कूटी चोरी कर ली, जिसके बाद उसे मात्र छह सौ रुपए में बेच दिया, हालांकि बाद में दोनो पुलिस गिरफ्त में आ गए।

घटना नंबर दो
गत सप्ताह पूर्व हल्दूचौड़ में सितारगंज से आए नशेड़ी युवक ने दुकान के बाहर रखी पेंट की बाल्टी चाेरी कर ली, वह बाल्टी को बेचने के फिराक में था कि पुलिस के हाथ लग गया।

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घटना नंबर तीन

बिंदुखत्ता निवासी एक युवक नशे के लिए स्वजनों पर पैसा देने के लिए दबाव बना रहा है, पैसा नही देने पर आत्महत्या करने व अपने को चोट पहुंचाने जैसी हरकतें कर ब्लैकमेल कर रहा है।

घटना चार
पु़राना बिंदुखेड़ा में एक युवक ने नशे के लिए अपनी दादी के बख्से में रखे ग्लोबंद के दाने एक एक कर बेच दिए, दादी को तब पता चला जब सिर्फ ग्लोबंद की डोरी बची रह गई।

ग्राम सभा में पानी के ट्यूबल व अन्य सुनसान स्थानों में नशेड़ी किस्म के युवकों की आवाजाही को रोकने के लिए ट्यूबल के आगे बनी हौजी को बंद करना शुरू कर दिया है। इसके अलावा ग्रामीणों को जागरुक किया जा रहा हैँ।

भाष्कर भट्ट, ग्राम प्रधान

क्षेत्र में स्मैक का नशा खतरनाक रूप लेता जा रहा है, कई घर बरबाद हो गए है, जिसके लिए हमें सामुहिेक प्रयास करने होंगे, जल्द ही जागरुकता अभियान चलाया जाएगा।
खीम सिंह बिष्ट, अध्यक्ष ब्यापार मंडल हल्दुचौड़

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