पहले अपने जांघ फिर बाजू में मारी गाेली, इसके बाद बुला ली पुलिस, जानें क्‍यों

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किराए के ₹2 लाख से ज्यादा पेंडिंग होने पर पीजी चलाने वाले एक युवक ने मकान मालिक को हत्या की कोशिश के केस में फंसाने की खौफनाक साजिश रच डाली. इसके लिए उसने अपनी खुद की जान को खतरे में डाल दिया. अपनी जांघ और बाजू में एक–एक गोली मारकर दोस्त के जरिए पीसीआर को सूचना दी कि उसका मकान मालिक उस पर गोलियां बरसा कर गया है. यह अलग बात है कि पुलिस ने मामले की जांच की तो घायल शिकायती को खुद अस्पताल से भागना पड़ गया.

बाद में पुलिस ने न सिर्फ शिकायती, बल्कि उसके भाई को भी साजिश में शामिल होने के आरोप में अरेस्ट कर लिया. दोनों के खिलाफ पुलिस को झूठी सूचना देने का मुकदमा आईपीसी की धारा 182 के तहत दर्ज किया गया है.

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पुलिस मौके पर पहुंची तो घायल को अस्पताल ले जाए जा चुका था. उसकी पहचान गुरुग्राम के रहने वाले 20 साल के सुमित के तौर पर हुई. सुमित अमर कॉलोनी इलाके में पीजी चलाता है. उसके दोस्त ने पीसीआर कॉल की थी. हमले का आरोप अपने मकान मालिक विकी पर लगाया. अमर कॉलोनी पुलिस ने उसके बयान पर हत्या की कोशिश का मुकदमा दर्ज कर लिया.

केस की जांच के चलते पुलिस को सुमित के बयानों में विरोधाभास नजर आया. उसका किसी और कॉल करते ही क्राइम spot से खुद हॉस्पिटल जाना और आसपास के सीसीटीवी फुटेज से पुलिस को उस पर शक बढ़ता गया. जब सुमित को लगने लगा कि अब वह अपने जाल में खुद ही फंस चुका है, तो वह हॉस्पिटल से फरार हो गया. पुलिस ने उसे शास्त्री नगर में उसकी बहन के घर से गिरफ्तार किया.

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आरोपी सुमित भड़ाना के साथ-साथ उसके भाई नवीन को भी आरेस्ट कर लिया. दोनों भाइयों ने बताया कि पीजी वाली बिल्डिंग का किराया करीब ₹2 लाख रुपए पेंडिंग हो गया था, जिस वजह से उनकी विक्की से कई बार बहस भी हो चुकी थी. इसलिए उसने विक्की को फंसाने की साजिश रची.

खुद की जांघ और हाथ में गोली मारकर दोस्त के जरिए पुलिस को कॉल करवाई. उसके बाद अपने भाई को हथियार देकर वहां से भेज दिया. उसने बातचीत के लिए मकान मालिक विकी को भी क्राइम स्पॉट पर बुलाया था, ताकि उस पर गोलियां मारने का इल्जाम मढ़ सके. विकी वहां से बातचीत करके चला गया था.

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पुलिस ने दोनों भाइयों से पूछताछ के चलते वह देसी पिस्तौल भी रिकवर कर ली जिससे सुमित ने खुद को गोली मारी थी. वारदात में इस्तेमाल स्कूटी भी रिकवर की गई है. दोनों के खिलाफ पुलिस को झूठी सूचना देने का मुकदमा आईपीसी की धारा 182 के तहत दर्ज किया गया है.