4 माह पूर्व नगर के उजाला अस्पताल में कंपाउंडर की संदिग्ध अवस्था में हुई मौत पर न्यायालय हुआ गंभीर

कंपाउंडर की संदिग्ध अवस्था में हुई मौत के मामले को न्यायालय ने संज्ञान में लेते हुए कोतवाली पुलिस को अभिलंब अस्पताल प्रशासन पर हत्या का मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना कराए जाने के दिए आदेश

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राजू अनेजा, काशीपुर। काशीपुर के सुप्रसिद्ध हॉस्पिटल के इमरजेंसी वार्ड में तैनात अस्पताल कर्मी की मौत को न्यायालय ने संज्ञान में लेते हुए काशीपुर कोतवाली को उक्त मामले की विवेचना के आदेश दिए हैं।

बताते चलें कि मलखान महाराज निवासी काशीपुर ने शहर के सुप्रसिद्ध अस्पताल के स्टाफ द्वारा साजिशन उसके भाई की हत्या का आरोप लगाते हुए न्यायालय से न्याय दिलाने की गुहार लगाते हुए बताया कि काशीपुर के उजाला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में पिछले 13 वर्षों से उसका भाई प्रदीप कुमार निवासी काशीपुर कंपाउंडर के पद पर कार्यरत था तथा 7 नवंबर 2021 को उसके भाई ने बताया था कि
अस्पताल के स्टाफ के साथ किसी बात को लेकर हुए विवाद के दौरान अस्पताल के स्टाफ द्वारा उसके साथ गाली-गलौच करते हुए अपमानित किया था जिसका जवाब उसने उनको उन्ही की भाषा में दे दिया था जिस कारण उसका भाई मानसिक दवाब में आ गया और अस्पताल के स्टाफ द्वारा उसे साजिशन किसी षड्यंत्र में फसाने की बात से काफी डरा हुआ था दिनॉंक 14.11.2021 को दिन रविवार समय
करीब 04ः30 बजे हॉस्पिटल द्वारा एक व्यक्ति को उसके भाई के घर भेजकर, भाई की पत्नी गीता को सूचित किया कि आपके पति की तबीयत खराब है और उसी वक्त उसकी पत्नी गीता उसी व्यक्ति के साथ स्कूटी पर हॉस्पिटल पहुॅची। हॉस्पिटल में जाकर
गीता को एकान्त में एक रूम के अंदर बैठा दिया तथा उसके पति से मिलने नहीं दिया डेढ़ घंटे बाद जब अस्पताल प्रशासन द्वारा उसके पति की मौत की सूचना देते हुए जब पति का शव दिखाया तो उसके
सिर के पिछले हिस्से में चोट लगी हुई थी और खून से लथपत था मृतक के भाई ने बताया कि शव
दोनों हाथो के अंगूठे पर नीली स्याही के
निशान थे। उसके शव को देखकर
यह महसूस किया जब तक उसके प्राण पूरी तरह से निकल गये हो तब तक अस्पताल प्रशासन ने उन्हें मिलने नहीं दिया और कहा कि अभी उनका उपचार
चल रहा है, और करीब डेढ घण्टे के बाद गीता को मिलवाया गया था भाई की मौत की खबर सुनने के बाद जब वह अस्पताल पहुंचा तो अस्पताल के स्टाफ के कुछ लोगों ने बताया कि उसके भाई की हत्या हुई है जिसकी सूचना जब कोतवाली पुलिस को दी गई तो पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही ना होने पर उसने दिनॉंक 11.01.2022 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, उधम
सिंह नगर व पुलिस के अन्य उच्चाधिकारियो के आगे न्याय की गुहार लगाई , परन्तु फिर भी कोई कार्यवाही
नहीं हुई और तंग आकर फिर भाई को न्याय दिलाने के लिए नगर के प्रमुख अधिवक्ता संजीव अकाश के द्वारा न्यायालय का दरवाजा खटखटाया पूरा मामला न्यायालय के सामने आने के बाद न्यायालय ने तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए अस्पताल प्रशासन द्वारा प्रथम दृष्टि में अपराध साबित होना बताया तथा पूरे मामले की विवेचना कराया जाना न्यायोचित प्रतीत मानते हुए कोतवाली पुलिस को उक्त मामले पर अभिलंब मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना के आदेश जारी किए।

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