
राजू अनेजा, रुद्रपुर।काशीपुर–रुद्रपुर हाईवे पर एक दर्दनाक हादसे ने इंसानियत की आत्मा को झकझोर कर रख दिया। एक युवक की जान चली गई, लेकिन उससे भी ज़्यादा भयावह था मौत के बाद का मंजर। कोहरे की चादर ओढ़े हाईवे पर युवक को किसी ने नहीं देखा—और एक के बाद एक वाहन उसके शरीर के ऊपर से गुजरते चले गए।
हादसे की भयावहता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि युवक का सिर धड़ से अलग हो गया और शरीर के अंग सड़क पर बिखर गए। हाईवे पर फैले मांस के लोथड़े मानो समाज से पूछ रहे हों—क्या इंसान की जान अब इतनी सस्ती हो गई है?
सूचना पर दरोगा चंदन बिष्ट और एएसआई नवीन जोशी मौके पर पहुंचे। यातायात रोका गया। अंधेरा और कोहरा था, कोई संसाधन नहीं—पुलिसकर्मी हाथों में पन्नियां बांधकर मोबाइल की रोशनी में इंसान के बिखरे अंग समेटते रहे। यह दृश्य व्यवस्था की संवेदनहीनता का आईना था।
पास से एक तिरपाल मंगाकर शव के अवशेष एकत्र किए गए और पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेजे गए। मृतक की शिनाख्त नहीं हो सकी है। पुलिस उसकी पहचान कराने में जुटी है।
यह खबर सिर्फ एक दुर्घटना की नहीं, बल्कि उस समाज की कहानी है जहां मौत के बाद भी रफ्तार नहीं थमती—और इंसानियत अक्सर सड़क किनारे दम तोड़ देती है।


