
रूट कैनाल कराने गया था छात्र, कथित गलत एनेस्थीसिया के बाद बिगड़ी हालत; दिल्ली में तीन सर्जरी, एक साल बाद डेंटिस्ट पर FIR
राजू अनेजा, काशीपुर। रूट कैनाल कराने गए 17 वर्षीय छात्र के लिए दांत का इलाज जिंदगी का सबसे भयावह अनुभव बन गया। परिजनों का आरोप है कि उपचार के दौरान गलत तरीके से इंजेक्शन लगाने के बाद छात्र की हालत बिगड़ती चली गई। चेहरे पर गंभीर संक्रमण फैला और नाक व आसपास की त्वचा तक क्षतिग्रस्त हो गई। हालत इतनी गंभीर हुई कि उसे दिल्ली के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां उसकी तीन सर्जरी हो चुकी हैं। इस घटना ने छात्र का चेहरा ही नहीं बिगाड़ा, बल्कि उसकी पढ़ाई पर भी असर डाला और यूनिवर्सिटी में उसका एडमिशन तक नहीं हो सका।
मामले में पीड़ित की मां की तहरीर पर करीब एक वर्ष बाद काशीपुर कोतवाली पुलिस ने डेंटिस्ट डॉ. संजय कुमार गोला के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रूट कैनाल कराने गया था, इंजेक्शन के बाद बिगड़ी हालत
जसपुर खुर्द निवासी मीना यादव ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि जुलाई 2025 में उनका बेटा तेजस यादव मुरादाबाद रोड स्थित यशोवीर डेंटल केयर में दांत की रूट कैनाल कराने गया था। आरोप है कि उपचार के दौरान डॉ. संजय गोला ने एनेस्थीसिया का इंजेक्शन गलत स्थान पर लगा दिया।
परिजनों के अनुसार इसके बाद तेजस की हालत अचानक बिगड़ गई। उसकी नसों में ब्लॉकेज की स्थिति बनी, उसे खून की उल्टी हुई और रक्तचाप अनियंत्रित हो गया। इसके बाद चेहरे पर गंभीर संक्रमण फैलने लगा और उसकी स्थिति लगातार नाजुक होती चली गई।
नाक और आसपास की त्वचा हुई क्षतिग्रस्त
हालत बिगड़ने पर परिजन तेजस को दिल्ली के अपोलो अस्पताल ले गए। वहां चिकित्सकों ने उसका उपचार शुरू किया। परिजनों के मुताबिक अब तक उसकी तीन सर्जरी हो चुकी हैं। संक्रमण के कारण नाक और उसके आसपास का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे उसका चेहरा विकृत हो गया।
परिवार का आरोप है कि उपचार के दौरान हुई कथित चिकित्सकीय लापरवाही ने उनके बेटे की जिंदगी को संकट में डाल दिया। जिस उम्र में तेजस को विश्वविद्यालय जाकर अपने भविष्य की नींव रखनी थी, उसी दौरान उसे अस्पतालों और सर्जरी के दौर से गुजरना पड़ा। हालत ऐसी रही कि उसका यूनिवर्सिटी एडमिशन भी नहीं हो पाया।
बार-बार शिकायत, फिर भी कार्रवाई में लगा लंबा वक्त
मीना यादव का आरोप है कि मामले में उन्होंने लगातार कार्रवाई की मांग की, लेकिन उन्हें समय पर न्याय नहीं मिला। उन्होंने 16 अक्टूबर 2025 और 20 जनवरी 2026 को सीएम पोर्टल पर शिकायत की। इसके बाद 29 जनवरी 2026 को सीएम कैंप कार्यालय के माध्यम से भी शिकायत की गई।
परिवार का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच तो की, लेकिन आरोपित के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। जांच के बाद 50 हजार रुपये का जुर्माना तय किया गया और क्लीनिक बंद कराने की संस्तुति की गई।
जांच में अपंजीकृत मिला क्लीनिक
सीएमओ के निर्देश पर मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई। इसमें एसीएमओ डॉ. डीपी सिंह, वरिष्ठ डेंटिस्ट डॉ. एलडी भट्ट और वरिष्ठ सर्जन डॉ. तरुण सिंह तोमर शामिल रहे।
11 जून 2026 की जांच रिपोर्ट के अनुसार आरसीटी के दूसरे चरण में एनेस्थीसिया देने के बाद तेजस सदमे जैसी स्थिति में चला गया था। जांच में एनेस्थीसिया के अनुचित प्रयोग से रक्त वाहिका फटने और नाक के आसपास नेक्रोसिस होने की बात सामने आई।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि डॉ. संजय गोला का क्लीनिक पंजीकृत नहीं था। समिति ने गैर-पंजीकृत केंद्र पर चिकित्सा सेवा देने के मामले में 50 हजार रुपये जुर्माना लगाने के साथ क्लीनिक तत्काल बंद कराने की संस्तुति की।
परिवार का दावा—जुर्माने के बाद भी चलता रहा क्लीनिक
पीड़ित की मां का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्रवाई की संस्तुति के बावजूद क्लीनिक अभी भी संचालित किया जा रहा है। अब मामले में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
एक तरफ 17 साल का छात्र अपने चेहरे को वापस पाने के लिए सर्जरी के दौर से गुजर रहा है, दूसरी तरफ उसका परिवार कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय कराने की लड़ाई लड़ रहा है। अब पुलिस जांच में यह साफ होना बाकी है कि आखिर उपचार के दौरान क्या हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
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