आर्म्स एक्ट का केस अदालत में ढह गया, गवाह तक पेश नहीं कर सकी पुलिस… आरोपी बरी

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आठ साल पुराने अवैध तमंचा बरामदगी के मामले में कोर्ट का फैसला, साक्ष्य के अभाव में आरोपी को मिली राहत

राजू अनेजा,काशीपुर। वर्ष 2018 में अवैध तमंचा बरामदगी के आरोप में गिरफ्तार किए गए आरोपी को आखिरकार अदालत ने बरी कर दिया। न्यायिक मजिस्ट्रेट (द्वितीय) काशीपुर की अदालत ने स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। पुलिस न तो एक भी गवाह कोर्ट में पेश कर सकी और न ही जब्ती मेमो समेत दस्तावेजों को विधिवत साबित कर पाई।

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मामला 23 अक्टूबर 2018 का है। पुलिस ने दावा किया था कि मुखबिर की सूचना पर डिज़ाइन सेंटर, मुरादाबाद रोड के पास ई-रिक्शा सवार ओमप्रकाश निवासी लक्ष्मीपुर पट्टी को पकड़कर उसके कब्जे से 315 बोर का अवैध तमंचा बरामद किया था। इसके बाद उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 के तहत मुकदमा दर्ज कर चार्जशीट दाखिल की गई।

 

कोर्ट में नहीं आया एक भी गवाह

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष न तो किसी मौखिक गवाह को अदालत में पेश कर पाया और न ही बरामदगी से जुड़े दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में साबित कर सका। पर्याप्त अवसर मिलने के बावजूद साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए, जिसके बाद अदालत ने अभियोजन का साक्ष्य बंद कर दिया।

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‘संदेह से परे अपराध साबित करना जरूरी’

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अनुसार आरोप साबित करने की जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष की होती है। जब अभियोजन ही आरोपों को प्रमाणित नहीं कर पाया तो आरोपी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। आपराधिक मामलों में संदेह से परे अपराध सिद्ध होना आवश्यक है।

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आठ जुलाई को आया फैसला

न्यायालय ने 8 जुलाई 2026 को फैसला सुनाते हुए आरोपी ओमप्रकाश को आर्म्स एक्ट की धारा 3/25 के आरोप से दोषमुक्त कर दिया। साथ ही उसकी जमानत और बंधपत्र से संबंधित आवश्यक आदेश भी जारी किए।

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