पहले ही प्रयास में आयुष्मान ने हासिल की 1688वीं रैंक: नीट-यूजी में 646 अंक पाकर चमकाया नाम, अब एम्स पर है नजर

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देहरादून। यदि दृढ़ संकल्प, सही रणनीति और अनुशासन हो तो पहले ही प्रयास में देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक ‘नीट-यूजी’ (NEET-UG) में बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। इसे देहरादून के जीएमएस रोड स्थित विवेक विहार निवासी आयुष्मान त्यागी ने सच कर दिखाया है। आयुष्मान ने अपने पहले ही प्रयास में नीट-यूजी परीक्षा में शानदार 646 अंक अर्जित कर ऑल इंडिया 1688वीं रैंक हासिल की है। इस शानदार सफलता के बाद अब उनका अगला लक्ष्य प्रतिष्ठित एम्स (AIIMS) में दाखिला पाकर देश के बेहतरीन डॉक्टर बनने का है।

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आयुष्मान की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी बेहद मजबूत रही है। उन्होंने इसी वर्ष किंग्सटन पब्लिक स्कूल से 92 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है। उनके पिता मदन लाल दवा व्यवसायी हैं और माता वर्षा गृहिणी हैं। आयुष्मान की इस कामयाबी पर पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। परिजनों का कहना है कि आयुष्मान ने बचपन से ही अपनी पढ़ाई को लेकर एक कड़ा अनुशासन बनाए रखा और वह कभी भी अपने तय लक्ष्य से भ्रमित नहीं हुए।

अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का मूल मंत्र साझा करते हुए आयुष्मान कहते हैं कि यह बिल्कुल मायने नहीं रखता कि आप रोजाना कितने घंटे पढ़ाई करते हैं, बल्कि सबसे ज्यादा जरूरी यह है कि आप किस एकाग्रता और तरीके से पढ़ते हैं। उन्होंने युवाओं को संदेश देते हुए कहा कि अपना लक्ष्य स्वयं तय करें और हर दिन उसे हासिल करने के लिए आगे बढ़ें। दूसरों की प्रगति पर ध्यान देने के बजाय अपनी तैयारी को लगातार बेहतर बनाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। अपनी तैयारी के दौरान आयुष्मान ने नियमित रिवीजन, मॉक टेस्ट और अपनी गलतियों का बारीकी से विश्लेषण करने को अपनी दिनचर्या का मुख्य हिस्सा बनाया। खास बात यह है कि पढ़ाई के भारी दबाव के बीच भी वह मानसिक ताजगी के लिए समय निकालकर क्रिकेट खेलते रहे। उनका मानना है कि सही रणनीति, निरंतर अभ्यास और अटूट आत्मविश्वास ही किसी भी बड़े लक्ष्य को भेदने की सबसे मजबूत नींव है।

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