विधायक निधि खर्च करने में बत्रा ने लगाई छलांग, मुख्यमंत्री धामी पिछड़े

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77 प्रतिशत निधि खर्च कर रुड़की विधायक सबसे आगे, धामी 65.61 प्रतिशत के साथ पीछे; चार मंत्री भी मुख्यमंत्री से निकले आगे

राजू अनेजा,काशीपुर। उत्तराखंड में विधायक निधि के खर्च को लेकर सामने आए आंकड़ों ने सियासी हलकों में चर्चा तेज कर दी है। विधायक निधि खर्च करने के मामले में रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा ने बाजी मार ली है, जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी उनसे पीछे हैं। बत्रा ने उपलब्ध विधायक निधि का 77 प्रतिशत खर्च किया है, जबकि मुख्यमंत्री धामी के खाते में 65.61 प्रतिशत खर्च दर्ज है।

खास बात यह है कि विधायक निधि खर्च करने में मुख्यमंत्री धामी से चार मंत्री भी आगे हैं। आरटीआई के जरिए सामने आए ये आंकड़े प्रदेश में विधायकों को मिली विकास निधि के इस्तेमाल की तस्वीर सामने रखते हैं।

कुल 1664 करोड़ की निधि, खर्च हुए 1091.29 करोड़

काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन (एडवोकेट) ने ग्राम्य विकास आयुक्त कार्यालय से विधायकों की विधायक निधि की उपलब्धता और खर्च का विवरण मांगा था। इसके जवाब में उपायुक्त (प्रशासन) हेमन्ती गुंजियाल ने पत्रांक 319762 के माध्यम से वर्तमान विधायक निधि का विवरण उपलब्ध कराया।

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आरटीआई से उपलब्ध सूचना के अनुसार वर्ष 2022-23 से 2025-26 और जून 2026 तक प्रदेश के विधायकों को कुल 166400 लाख रुपये यानी 1664 करोड़ रुपये की विधायक निधि उपलब्ध हुई। इसमें से 109129.19 लाख रुपये यानी करीब 66 प्रतिशत निधि खर्च की गई है। करीब 34 प्रतिशत निधि अब भी खर्च होना बाकी है।

बत्रा 77 प्रतिशत के साथ टॉप पर

विधायक निधि खर्च करने वालों की सूची में रुड़की विधायक प्रदीप बत्रा 77 प्रतिशत खर्च के साथ सबसे ऊपर हैं। उनके बाद 76 प्रतिशत खर्च करने वाले फुरकान अहमद, रवि बहादुर, सरवत करीम और मदन सिंह बिष्ट समेत विधायक शामिल हैं।

75 प्रतिशत खर्च करने वालों में चंदन रामदास और महेश सिंह जीना शामिल हैं। 74 प्रतिशत खर्च करने वालों में उमेश शर्मा, गोपाल सिंह और सुमित हृदयेश के नाम हैं।

73 प्रतिशत खर्च करने वालों में ब्रज भूषण गैरोला, आदेश सिंह (बीएचईएल), अनुपमा रावत, राज कुमार पोरी, मोहन सिंह, डॉ. मोहन सिंह (लालकुआं) और फकीर राम शामिल हैं।

मुख्यमंत्री से आगे चार मंत्री

मंत्रियों के बीच विधायक निधि खर्च के आंकड़ों को देखें तो प्रदीप बत्रा 77 प्रतिशत के साथ सबसे आगे हैं। इसके बाद सौरभ बहुगुणा 72 प्रतिशत, सतपाल महाराज 68 प्रतिशत और खजान दास 66.11 प्रतिशत निधि खर्च के साथ मुख्यमंत्री धामी से आगे हैं।

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वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 65.61 प्रतिशत विधायक निधि खर्च की है।

इसके बाद गणेश जोशी 65.45 प्रतिशत, राम सिंह कैड़ा 62 प्रतिशत, रेखा आर्य 60 प्रतिशत, सुबोध उनियाल 57 प्रतिशत और धन सिंह रावत 37 प्रतिशत खर्च के साथ सूची में हैं।

निधि खर्च में कई दिग्गज पीछे

आंकड़ों में कुछ बड़े राजनीतिक चेहरों की विधायक निधि खर्च करने की स्थिति भी सामने आई है। सबसे कम खर्च करने वालों में किशोर उपाध्याय 30 प्रतिशत के साथ सबसे नीचे हैं। इसके बाद धन सिंह रावत 37 प्रतिशत, रेणु बिष्ट 44 प्रतिशत, प्रीतम सिंह 51 प्रतिशत और सुरेश गड़िया 52 प्रतिशत पर हैं।

खुशाल सिंह ने 53 प्रतिशत, प्रेमचंद्र अग्रवाल ने 54 प्रतिशत, यशपाल आर्य और शक्तिलाल शाह ने 55 प्रतिशत तथा प्रमोद नौटियाल ने 56 प्रतिशत विधायक निधि खर्च की है। 57 प्रतिशत खर्च करने वालों में शैला रानी, भरत सिंह और सुबोध उनियाल शामिल हैं।

अब बड़ा सवाल—बाकी 34 प्रतिशत निधि का क्या होगा?

विधायक निधि के आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं जब मौजूदा विधायकों के कार्यकाल का बड़ा हिस्सा बीत चुका है। प्रदेश स्तर पर उपलब्ध कुल निधि में से 34 प्रतिशत का जून 2026 तक खर्च न हो पाना अपने आप में बड़ा आंकड़ा है।

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विधायक निधि का मकसद स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति देना है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब विधानसभा चुनाव की अगली तैयारी का दौर करीब आ रहा है, तब इतनी बड़ी राशि अभी तक खर्च क्यों नहीं हो सकी?

हालांकि विधायक निधि खर्च की प्रक्रिया में प्रस्ताव, स्वीकृति, विभागीय औपचारिकताओं और कार्य निष्पादन जैसे कई चरण शामिल होते हैं। इसलिए केवल खर्च प्रतिशत के आधार पर किसी विधायक की कार्यक्षमता पर सीधा निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन आरटीआई के आंकड़े इतना जरूर बताते हैं कि विकास निधि खर्च करने की रफ्तार विधायकों के बीच एक जैसी नहीं है—और इसी आंकड़ों की दौड़ में बत्रा टॉप पर, जबकि मुख्यमंत्री धामी उनसे पीछे हैं।

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