तिरंगे से पहले आरओबी पर फहरा ‘खतरे का झंडा’ ! सड़क चीरकर निकला जानलेवा सरिया , सीमेंट का कट्टा रखकर निभाई जिम्मेदारी; हर पल हादसे का खतरा

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राजू अनेजा, काशीपुर। स्वतंत्रता दिवस पर पूरे देश में तिरंगा फहराने की तैयारियां चल रही हैं, लेकिन काशीपुर के बहुचर्चित रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) पर लोगों को तिरंगे से पहले ‘खतरे का झंडा’ दिखाई दे रहा है। पुल की सड़क को चीरकर बाहर निकला लोहे का मोटा सरिया राहगीरों और वाहन चालकों के लिए जानलेवा खतरा बन गया है। हैरानी की बात यह है कि संबंधित विभाग ने स्थायी मरम्मत कराने के बजाय सरिए के पास केवल सीमेंट का कट्टा रखकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली है।

 

शुरुआत से ही विवादों में रहा आरओबी

शहर में करोड़ों रुपये की लागत से बने इस आरओबी का उद्घाटन होने के कुछ ही महीनों बाद इसकी खामियां सामने आने लगी थीं। कभी एक्सपेंशन जॉइंट क्षतिग्रस्त हुए, कभी सुरक्षा दीवार टूटी, तो कभी पुल की सतह से लोहे के सरिए बाहर निकल आए। लगातार सामने आ रही इन खामियों ने निर्माण की गुणवत्ता और कार्यदायी संस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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रोज गुजरते हैं हजारों वाहन, फिर भी नहीं जाग रहा विभाग

इस आरओबी से प्रतिदिन हजारों दोपहिया, कारें, स्कूल वाहन और भारी वाहन गुजरते हैं। सड़क के बीच निकला सरिया किसी भी वाहन का टायर फाड़ सकता है या चालक का संतुलन बिगाड़कर बड़े हादसे की वजह बन सकता है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग की ओर से अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया है।

 

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लकवाग्रस्त आरओबी’ कहने लगे हैं लोग

लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों के कारण स्थानीय लोग अब इस पुल को व्यंग्य में ‘लकवाग्रस्त आरओबी’ कहने लगे हैं। लोगों का कहना है कि जिस पुल का निर्माण जनता की सुविधा के लिए किया गया था, वही आज डर और असुरक्षा का कारण बन गया है।

 

हर शिकायत के बाद खानापूर्ति, स्थायी समाधान का इंतजार

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि आरओबी पर जब भी कोई खामी सामने आती है, विभाग केवल अस्थायी मरम्मत कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देता है। नतीजा यह है कि कुछ समय बाद फिर कोई नई तकनीकी खराबी सामने आ जाती है।

 

जनता का सवाल—क्या बड़े हादसे के बाद खुलेगी जिम्मेदारों की आंख?

स्वतंत्रता दिवस से पहले शहरवासियों ने आरओबी की तत्काल तकनीकी जांच कराकर सभी खामियों को दूर करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुल की मरम्मत नहीं की गई तो यह किसी भी दिन बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार विभाग किसी अनहोनी का इंतजार कर रहा है या फिर समय रहते इस ‘खतरे के झंडे’ को हटाकर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा?

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