शिक्षा सुधारों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री की बर्खास्तगी की मांग को लेकर रामनगर में धरना: जंतर-मंतर पर जारी भूख हड़ताल के समर्थन में आए सामाजिक संगठन
रामनगर। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी भूख हड़ताल के समर्थन में समाजवादी लोक मंच ने मोर्चा खोल दिया है। मंच के कार्यकर्ताओं ने देश में व्यापक शिक्षा सुधारों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की बर्खास्तगी की मांग को लेकर रविवार को रामनगर के लखनपुर चौक पर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर जनविरोधी नीतियां अपनाने और शांतिपूर्ण छात्र आंदोलनों का दमन करने का गंभीर आरोप लगाया।
धरना-प्रदर्शन के दौरान जनसभा का संचालन करते हुए ललित उप्रेती ने कहा कि पिछले तीन सप्ताह से अधिक समय से ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के छात्र नेता, कॉक्रोच जनता पार्टी के प्रतिनिधि और प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक दिल्ली में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लेकिन सरकार संवेदनहीन बनी हुई है और वार्ता के जरिए छात्रों व युवाओं की ज्वलंत समस्याओं का समाधान निकालने के बजाय आंदोलन को कुचलने का प्रयास कर रही है।
‘केजी से पीजी तक मिले निशुल्क और समान शिक्षा’
समाजवादी लोक मंच के संयोजक मुनीष कुमार ने मंच की प्रमुख मांगों को दोहराते हुए कहा कि देश में शिक्षा का निजीकरण और इसमें विदेशी पूंजी निवेश (FDI) पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि देश के हर नागरिक को केजी (KG) से लेकर पीजी (PG) तक निशुल्क, वैज्ञानिक, गुणवत्तापूर्ण, समान और मातृभाषा में शिक्षा दी जाए। इसके साथ ही उन्होंने लंबे समय से मानदेय पर काम कर रहीं भोजनमाताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और संविदा शिक्षकों को नियमित नियुक्ति देने की पुरजोर वकालत की।
प्रदर्शन में शामिल समाजवादी नेता जमन राम ने देश की दोहरी और तिहरी शिक्षा प्रणाली पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमीर और गरीब के लिए अलग-अलग तरह की शिक्षा व्यवस्था समाज में असमानता बढ़ा रही है। उन्होंने शिक्षा के निजीकरण और इसके साम्प्रदायिकीकरण के खिलाफ आम जनता से एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया। इस विरोध-प्रदर्शन में आइसा के सुमित कुमार, प्रगतिशील छात्र संगठन (पछास) के रवि सिंह, महिला एकता मंच की ललिता रावत, रेनू सैनी, मानवी, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी (उपपा) के नेता मोहम्मद आसिफ और व्यापार मंडल के संरक्षक मनमोहन अग्रवाल व प्रेमराम सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता व स्थानीय लोग मुख्य रूप से मौजूद रहे।


