हाई कोर्ट में जनहित याचिका के बाद झुका आबकारी विभाग: उत्तराखंड में नहीं खुलेंगी नई शराब की दुकानें, हटवाल गाँव की दुकान भी बंद

नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट के कड़े रुख और जौनपुर ब्लॉक की जिला पंचायत सदस्य सीता देवी मनवाल की ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) के बाद आबकारी विभाग को अपना फैसला बदलने पर मजबूर होना पड़ा है। आबकारी आयुक्त ने एक नया आदेश जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि प्रदेश में कोई भी नई मदिरा की दुकान नहीं खोली जा सकती है। इसके साथ ही टिहरी गढ़वाल के हटवाल गाँव में स्थानीय विरोध के बावजूद खोली गई नई शराब की दुकान को भी तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इन नए तथ्यों को रिकॉर्ड पर लेते हुए जनहित याचिका को अंतिम रूप से निस्तारित कर दिया है।
मामला टिहरी गढ़वाल जिले के जौनपुर ब्लॉक स्थित हटवाल गाँव का है, जहाँ एक नई शराब की दुकान खोलने पर स्थानीय ग्रामीणों का भारी आक्रोश भड़क गया था। जनभावनाओं को देखते हुए जिलाधिकारी (DM) ने दुकान को बंद करने के आदेश दिए थे, लेकिन शराब विक्रेता ने इस फैसले के खिलाफ आबकारी आयुक्त के समक्ष अपील कर दी। आबकारी आयुक्त ने 16 मई 2026 के अपने आदेश में एक तरफ तो माना कि जनभावनाओं के अनुरूप ही दुकान चलनी चाहिए, लेकिन दूसरी तरफ डीएम की रोक को हटाते हुए विक्रेता को दुकान संचालित करने की अनुमति दे दी। इस फैसले के खिलाफ जिला पंचायत सदस्य ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। याचिका में नई आबकारी नीति के प्रावधान 3.14 का हवाला दिया गया, जिसके तहत वर्ष 2024-25 से चली आ रही पुरानी दुकानों को तो आगे बढ़ाया जा सकता है, परंतु किसी भी क्षेत्र में नई दुकान खोलने पर पूरी तरह प्रतिबंध है।
हाई कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद आबकारी विभाग बैकफुट पर आ गया। 5 जुलाई को कोर्ट में याचिका दाखिल होने के तुरंत बाद आबकारी आयुक्त ने 6 जुलाई 2026 को एक नया संशोधित आदेश जारी किया। इस नए आदेश में नीतिगत प्रावधानों को स्पष्ट करते हुए साफ किया गया कि राज्य में कोई भी नई दुकान नहीं खुलेगी और हटवाल गाँव की दुकान को बंद करा दिया गया। 15 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को अवगत कराया कि विभाग ने अपनी गलती सुधारते हुए उक्त दुकान को बंद कर दिया है। इसके बाद अदालत ने याचिका को निस्तारित कर दिया। बड़ी बात यह है कि आबकारी आयुक्त का यह नया निर्णय अब केवल टिहरी जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे उत्तराखंड के सभी 13 जनपदों में सख्ती से लागू कर दिया गया है।
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