
राजू अनेजा,कालाढूंगी । जिस पिता ने कुछ दिन पहले अपने जवान बेटे को खोया हो, उससे बड़ा दुख शायद कोई नहीं होता। लेकिन साइबर ठगों की संवेदनहीनता देखिए कि बेटे की मौत के गम में डूबे पिता को भी उन्होंने नहीं छोड़ा। आरोपी को जेल भेजने और “15 लाख का क्लेम” दिलाने का झांसा देकर ठग ने खुद को कोतवाल बताकर 15 हजार रुपये की मांग कर डाली। गनीमत रही कि पीड़ित समय रहते समझ गया और ठगी का शिकार होने से बच गया।
कोटाबाग क्षेत्र के थपलियागाजा निवासी ग्राम प्रधान धन सिंह का 17 वर्षीय बेटा जगदीश ऑनलाइन गेमिंग की लत में फंस गया था। बताया जा रहा है कि गेम खेलने के दौरान उसने कुछ लोगों से रुपये उधार ले लिए थे। पैसों की लगातार मांग और मानसिक दबाव से परेशान होकर छह मई को जगदीश ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली थी। बेटे की मौत के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
घटना के बाद धन सिंह ने अभय गुप्ता नाम के युवक पर बेटे का उत्पीड़न करने का आरोप लगाते हुए पुलिस को नामजद तहरीर दी थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रविवार को धन सिंह बयान दर्ज कराने पुलिस चौकी जा रहे थे। इसी दौरान उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आई। फोन करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए पूछा— “क्या अभय गुप्ता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है? लड़का एक्सपायर हो गया क्या?” दुखी पिता ने उसे पूरी घटना बता दी।
इसके बाद ठग ने अपना असली खेल शुरू किया। उसने कहा कि आरोपी को जेल भेजा जा रहा है, लेकिन कुछ धाराएं बढ़ानी पड़ेंगी। इसके लिए “गाड़ी और कार्रवाई” में 15-20 हजार रुपये खर्च होंगे। ठग ने लालच दिया कि बाद में 15 लाख रुपये का क्लेम भी दिलवा दिया जाएगा और पूरा पैसा वापस मिल जाएगा।
फोन पर ठग लगातार दबाव बनाता रहा। उसने धन सिंह से कहा कि चौकी मत जाओ, शाम को बयान होंगे… पहले पैसों का इंतजाम करो। खुद को “सैनी साहब” बताते हुए वह बार-बार जल्दी पैसे भेजने की बात कहता रहा।
लेकिन धन सिंह को शक हो गया और वह सीधे पुलिस चौकी पहुंच गए। वहां उन्होंने पूरी जानकारी एसआई देवेंद्र राणा को दी। पुलिस ने जब उस नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की तो मोबाइल स्विच ऑफ मिला।
घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी अब लोगों के दुख और मजबूरी को भी कमाई का जरिया बना रहे हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि कोई भी पुलिस अधिकारी फोन पर रुपये नहीं मांगता। ऐसे किसी भी कॉल की तुरंत सूचना पुलिस को दें।
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