किश्तवाड़ मुठभेड़ में कपकोट के गजेंद्र गढ़िया हुए शहीद, गांव में छाया शोक, टू पैरा कमांडो सीआरपीएफ में थे तैनात

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बागेश्वर: जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में हुई मुठभेड़ में कपकोट क्षेत्र के वीथी-पन्याती गांव निवासी गजेंद्र गढ़िया देश की सेवा करते हुए बलिदान हो गए। बलिदान की सूचना मिलते ही उनके पैतृक गांव सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
बलिदानी गजेंद्र गढ़िया सीआरपीएफ की टू पैरा कमांडो यूनिट में तैनात थे।

वह मुठभेड़ के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए। गजेंद्र की पत्नी लीला गढ़िया दो बच्चों के साथ देहरादून में रहती हैं। जबकि उनके माता-पिता और छोटा भाई गांव में रहते हैं। घटना की सूचना मिलने के बाद पत्नी लीला गढ़िया बेहोश हो गईं, जिनका उपचार चल रहा है और उन्हें ड्रिप चढ़ाई गई है।
बलिदानी के छोटे भाई किशन गढ़िया ने बताया कि भाभी लीला गढ़िया अपने पुत्र राहुल और धीरज के साथ देहरादून से हेलीकाप्टर से कपकोट आ रही हैं।

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दोनों बच्चे देहरादून के एक निजी विद्यालय में कक्षा चार में अध्ययनरत हैं। हेलीकाप्टर के साथ सीआरपीएफ के जवान उनके साथ हैं। उन्होंने बताया कि बलिदानी गजेंद्र गढ़िया का पार्थिव शरीर मंगलवार को कपकोट के केदारेश्वर मैदान में हेलीकाप्टर से लाया जाएगा। इसके बाद पार्थिव शरीर को गांव ले जाया जाएगा, जहां स्वजन और ग्रामीण अंतिम दर्शन करेंगे।

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तत्पश्चात सैन्य सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।

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