भगवान भरोसे काशीपुर का अस्पताल, 100 ऑक्सीजन सिलिंडर गायब—सिस्टम को भनक तक नहीं

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कोरोना काल में जुटे थे 150 सिलिंडर घटकर रह गए 40-50, न रिकॉर्ड साफ न जवाबदेही तय; सुरक्षा में चूक और चोरी की घटनाओं ने बढ़ाए सवाल

 

राजू अनेजा,काशीपुर।जिस अस्पताल पर हजारों लोगों की सांसें टिकी हों, वहीं से ऑक्सीजन जैसे जीवनरक्षक संसाधनों का यूं गायब हो जाना पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है। काशीपुर के एलडी भट्ट राजकीय उप जिला चिकित्सालय में बीते चार वर्षों के भीतर करीब 100 ऑक्सीजन सिलिंडर रहस्यमय तरीके से गायब हो गए, और चौंकाने वाली बात यह है कि अस्पताल प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी।
अस्पताल के रिकॉर्ड और सूत्रों के अनुसार कोरोना महामारी के दौरान यहां करीब 150 छोटे-बड़े ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध थे। संकट की घड़ी में सामाजिक संस्थाओं और दानदाताओं ने भी बड़ी संख्या में सिलिंडर उपलब्ध कराए थे, लेकिन महामारी का असर कम होते ही ये सिलिंडर धीरे-धीरे कम होते गए। आज स्थिति यह है कि अस्पताल में सिर्फ 40 से 50 सिलिंडर ही शेष बताए जा रहे हैं, जबकि बाकी का कोई पुख्ता हिसाब-किताब स्वास्थ्य महकमे के पास नहीं है।

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रिकॉर्ड में गड़बड़ी, जवाबदेही शून्य

 

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में सिलिंडर कम होते रहे और किसी स्तर पर न तो अलर्ट जारी हुआ और न ही जिम्मेदारी तय की गई। अस्पताल में नियमित ऑडिट और स्टॉक मिलान की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

सुरक्षा में सेंध, चोरी का सिलसिला

 

अस्पताल सूत्रों का दावा है कि परिसर लंबे समय से सुरक्षा के लिहाज से कमजोर रहा है।
नशेड़ियों का जमावड़ा बना रहता है
कई बार चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं
ऑक्सीजन पाइप लाइन तक काटकर चोरी किए जाने के मामले सामने आए
इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के ठोस कदम नहीं उठाए गए। वर्तमान में बचे हुए कुछ सिलिंडर पुराने टीकाकरण विभाग के बंद कमरों में रखे हैं, जहां वे उपयोग के बजाय धूल फांक रहे हैं।

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 प्लांट चालू, लेकिन सवाल बरकरार

 

 

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि फिलहाल ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है।
ऑक्सीजन प्लांट सुचारू रूप से चल रहा है
नई पाइप लाइन भी बिछा दी गई है
लेकिन यह तर्क उस मूल सवाल को दबा नहीं पाता कि करीब 100 सिलिंडर आखिर गए कहां?

 

जिम्मेदारों का जवाब—“पुरानी जानकारी नहीं”

 

सीएमएस डॉ. संदीप दीक्षित ने कहा:
“जब मैंने चार्ज संभाला, तब जितने सिलिंडर थे, वही मिले। पुराने रिकॉर्ड की जानकारी नहीं है। अस्पताल में पहले भी चोरी की घटनाएं हुई हैं, जिनकी रिपोर्ट पुलिस में दर्ज कराई गई है। चोरी हुए सामान के बारे में पुलिस ही स्थिति स्पष्ट कर सकती है।”

 

उठते सवाल

 

क्या अस्पताल में समय-समय पर स्टॉक का सत्यापन नहीं किया गया?
सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों रही?
चोरी की घटनाओं के बाद क्या कार्रवाई हुई?
क्या यह सिर्फ चोरी है या किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत भी?

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जांच की मांग तेज

 

मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर जांच की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था पर गहरा अविश्वास पैदा करेगा।

यह मामला सिर्फ सिलिंडर गायब होने का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के भगवान भरोसे चलने का संकेत है। जहां जीवनरक्षक संसाधनों की निगरानी तक पुख्ता नहीं, वहां मरीजों की सुरक्षा पर भी सवाल उठना लाजिमी है।