मदरसों में बाहरी राज्यों के बच्चों का मामला: शासन ने दिए विस्तृत जांच के आदेश; देहरादून समेत चार जिलों में चलेगा सत्यापन अभियान

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देहरादून और उत्तराखंड के अन्य मैदानी जिलों के मदरसों में बाहरी राज्यों से बच्चों को लाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। शासन ने इस प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाते हुए विस्तृत जांच और सभी मदरसों के व्यापक सत्यापन के आदेश जारी किए हैं।

यहाँ इस प्रशासनिक निर्णय और मदरसों से जुड़ी नई व्यवस्था की मुख्य जानकारी दी गई है:

देहरादून (17 अप्रैल 2026): इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद, जिसमें अन्य राज्यों से बच्चों को लाकर मदरसों में रखने की बात कही गई थी, शासन ने इसे गंभीरता से लिया है। विशेष सचिव (अल्पसंख्यक) पराग मधुकर धकाते ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं।

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1. जांच के मुख्य बिंदु (Terms of Investigation)

जिलाधिकारी देहरादून को भेजी गई गाइडलाइंस में स्पष्ट किया गया है कि जांच में निम्नलिखित तथ्यों की पुष्टि की जाए:

  • आगमन का स्रोत: बच्चे मूल रूप से किस राज्य और शहर से लाए गए हैं?

  • अभिभावकों की सहमति: क्या बच्चों को लाने से पहले उनके माता-पिता से लिखित सहमति (Consent Letter) ली गई है?

  • मध्यस्थ की पहचान: वे कौन से व्यक्ति या संस्थाएं हैं जो इन बच्चों को उत्तराखंड लेकर आए और मदरसों में दाखिल कराया?

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2. चार जिलों में ‘व्यापक सत्यापन’ अभियान

केवल देहरादून ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के उन सभी जिलों में सत्यापन अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं जहाँ मदरसों की संख्या अधिक है:

  • चिन्हित जिले: देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल।

  • उद्देश्य: यह सुनिश्चित करना कि मदरसों में रह रहे बच्चों का डेटा पारदर्शी हो और किसी भी प्रकार के नियमों का उल्लंघन न हो।

3. ‘मदरसा बोर्ड’ का अंत और नई व्यवस्था

धामी सरकार पहले ही राज्य की अल्पसंख्यक शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव का निर्णय ले चुकी है:

  • 1 जुलाई 2026: इस तारीख से उत्तराखंड राज्य मदरसा बोर्ड आधिकारिक रूप से समाप्त हो जाएगा।

  • नया प्राधिकरण: मदरसा बोर्ड की जगह अब ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ कार्य करेगा।

  • लक्ष्य: मदरसों को आधुनिक शिक्षा और मुख्यधारा से जोड़ना, ताकि वहां पढ़ रहे बच्चों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप समान पाठ्यक्रम मिल सके।

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