गदरपुर की सियासी पिच पर गुंजन का दमदार शॉट, क्या पांडे के किले में सेंध की तैयारी?

खबर शेयर करें -


राजू अनेजा, गदरपुर।उधम सिंह नगर की सियासत इन दिनों गदरपुर की पिच पर नए समीकरण गढ़ रही है। भाजपा के प्रदेश मंत्री गुंजन सुखीजा ने यहां अपनी राजनीतिक बैटिंग तेज कर दी है और संकेत साफ हैं—इस बार वह सिर्फ रन बनाने नहीं, बल्कि लंबी पारी खेलने के इरादे से उतरे हैं।
गदरपुर सीट पर वर्षों से मजबूत पकड़ बनाए बैठे पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे का दबदबा अब भी कायम है, लेकिन हाल के दिनों में प्रदेश सरकार से उनकी तल्खी ने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। बयानबाजी की गूंज देहरादून से लेकर दिल्ली तक सुनाई दे रही है, जिसने टिकट को लेकर कयासों का बाजार गर्म कर दिया है।
इधर, गुंजन सुखीजा पिछले कई सालों से गदरपुर में जमीनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं। संगठन में सक्रियता, युवाओं के बीच पैठ और लगातार क्षेत्रीय दौरे उन्हें एक मजबूत दावेदार के तौर पर खड़ा कर रहे हैं। पार्टी के अंदर भी “नई टीम” को आगे लाने की रणनीति पर मंथन जारी है।
भाजपा के लिए दुविधा साफ है—एक ओर अनुभवी चेहरा अरविंद पांडे, जिनकी पकड़ और संगठन में वजन अब भी भारी है; दूसरी ओर युवा ऊर्जा के साथ मैदान में उतरे गुंजन, जो बदलाव की हवा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ऐसे में किसी एक को चुनना आसान नहीं दिख रहा।
सूत्रों की मानें तो मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी खुद उधम सिंह नगर की हर सीट पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं। पिछली बार जिले की 9 में से सिर्फ 4 सीटों पर सिमटी भाजपा इस बार “9 में 9” के लक्ष्य के साथ उतरने की तैयारी में है। ऐसे में पार्टी कोई भी ऐसा फैसला नहीं लेना चाहती, जिससे अंदरूनी असंतोष बढ़े।
अब सवाल यही है—क्या पार्टी अपने पुराने सिपाही पर भरोसा दोहराएगी या फिर युवा चेहरे को मौका देकर नया दांव खेलेगी?
गदरपुर की सियासी पिच पर फिलहाल मुकाबला दिलचस्प है… और असली शॉट चुनावी मैदान में ही देखने को मिलेगा।

यह भी पढ़ें 👉  हल्द्वानी: बीजेपी विधायक के बेटे से जमीन धोखाधड़ी; 5 भाइयों ने बेची सरकारी 'नहर और सड़क', अब दर्ज हुआ मुकदमा
अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -

👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

👉 हमारे फेसबुक पेज़ को लाइक करें

👉 हमारे टेलीग्राम चैनल से जुड़ें

यह भी पढ़ें 👉  रामनगर: होटल के कमरे में स्कूल ड्रेस में मिलीं दो नाबालिग छात्राएं, पुलिस ने होटल किया सील