हल्द्वानी: ऑनलाइन साइकिल बेचना पड़ा महंगा; गौलापार के भाई-बहन से ₹7,000 की साइबर ठगी

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हल्द्वानी: ऑनलाइन सेलिंग वेबसाइट पर पुराना सामान बेचना कभी-कभी भारी पड़ सकता है, इसका ताजा उदाहरण गौलापार में देखने को मिला। यहाँ एक किशोर और उसकी बहन को अपनी साइकिल बेचने के प्रयास में ₹7,000 गंवाने पड़े। साइबर ठग ने बड़ी चालाकी से उन्हें अपने झांसे में लेकर उनके ही खाते से पैसे उड़ा लिए।


🕸️ ठगी का शातिर तरीका: ‘पे’ (Pay) बटन का मायाजाल

साइबर ठगों ने विश्वास जीतने के लिए एक पुरानी लेकिन प्रभावी तकनीक का इस्तेमाल किया:

  • विज्ञापन: 15 वर्षीय किशोर ने अपनी साइकिल बेचने के लिए एक ऑनलाइन साइट पर फोटो डाली और कीमत ₹7,000 तय की।

  • भरोसा जीतना: गुरुवार को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया। उसने साइकिल खरीदने की पुष्टि की और विश्वास जीतने के लिए किशोर की बहन के खाते में ₹5 भेजे।

  • जालसाजी: ठग ने कहा कि लेनदेन चेक करने के लिए वह एक रिक्वेस्ट भेज रहा है। उसने निर्देश दिया— “रिटर्न में 7,000 लिखिए और ‘पे’ (Pay) पर क्लिक कर दीजिए।”

  • नतीजा: जैसे ही भाई-बहन ने ‘पे’ बटन दबाया, पैसे आने के बजाय उनके खाते से ₹7,000 कट गए।

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📞 ठग ने बताया अपना ठिकाना ‘पटना’

जब किशोरी को ठगी का एहसास हुआ, तो उसने तुरंत उस नंबर पर वापस कॉल किया। ठग ने बेखौफ होकर अपना निवास पटना (बिहार) बताया। इसके बाद पीड़िता अपनी मां के साथ शुक्रवार को पुलिस बहुउद्देशीय भवन स्थित साइबर सेल पहुंची।

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👮 पुलिस की त्वरित कार्रवाई

साइबर सेल प्रभारी गणेश मनोला ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कदम उठाए:

  • ट्रांजैक्शन होल्ड: पुलिस ने किशोरी के खाते से भेजी गई धनराशि को तकनीकी माध्यम से होल्ड (रुकवा) दिया है।

  • रिकवरी की उम्मीद: पुलिस अधिकारियों का कहना है कि समय रहते सूचना मिलने के कारण रुपये वापस दिलाने के प्रयास सफल हो सकते हैं।

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⚠️ सावधान! साइबर सेल की सलाह

“याद रखें, किसी से पैसे प्राप्त करने के लिए कभी भी अपना UPI PIN डालने या ‘Pay’ बटन दबाने की आवश्यकता नहीं होती है। ऑनलाइन सामान बेचते समय क्यूआर कोड (QR Code) स्कैन करने या अनजान लिंक्स पर क्लिक करने से बचें।