
राजू अनेजा,काशीपुर (ऊधम सिंह नगर)। जिले की तराई इन दिनों खून से लाल है। हत्या अब अपवाद नहीं, बल्कि रोजमर्रा की वारदात बन चुकी है। लगातार बढ़ते हत्या के मामलों ने न सिर्फ आमजन में दहशत पैदा कर दी है, बल्कि पुलिस की टेंशन भी चरम पर पहुंचा दी है। आंकड़े बताते हैं कि बीते तीन वर्षों में जिले में 116 हत्याएं दर्ज हो चुकी हैं, जो कानून-व्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश करती हैं।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 और 2024 में जिले में 44-44 लोगों की हत्या हुई, जबकि वर्ष 2025 में 28 दिसंबर तक 28 हत्या के मामले सामने आ चुके हैं। औसतन हर साल करीब 40 हत्याओं का आंकड़ा जिले को उत्तराखंड के सबसे संवेदनशील अपराध क्षेत्रों में शुमार कर रहा है। जिला मुख्यालय से लेकर जसपुर, काशीपुर, बाजपुर, गदरपुर, दिनेशपुर, पंतनगर, किच्छा, पुलभट्टा, सितारगंज और नानकमत्ता तक शायद ही कोई इलाका ऐसा बचा हो, जहां खून न बहा हो।
जिले में ही बन रहे तमंचे, अपराधियों के हौसले बुलंद
अपराधों में बेतहाशा बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अवैध हथियारों की आसान उपलब्धता मानी जा रही है। पहले जहां अपराधी हथियारों के लिए उत्तर प्रदेश या अन्य राज्यों का रुख करते थे, वहीं अब ऊधम सिंह नगर के भीतर ही अवैध असलहा निर्माण के अड्डे पनप चुके हैं। वर्ष 2015 में बिंदुखेड़ा के जंगल में अवैध हथियार फैक्टरी का खुलासा हुआ था। इसके बाद 2016 में बकैनिया, 2017 में नानकमत्ता और फरवरी 2023 में गदरपुर में भी अवैध असलहा बनाने के ठिकाने पकड़े जा चुके हैं।
इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि जिले में अपराधियों का नेटवर्क मजबूत होता जा रहा है और कानून का खौफ कमजोर पड़ता दिख रहा है।
लालच में रिश्तों का कत्ल, जमीन बनी खून की वजह
तराई में जमीन और संपत्ति के विवाद अब जानलेवा हो चुके हैं। भाई-भाई, पति-पत्नी और पारिवारिक रिश्तों के बीच खून बहने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। अगस्त 2023 में नवाबगंज निवासी व्यक्ति ने संपत्ति विवाद में अपने सगे भाई की हत्या कर दी। सितंबर 2024 में सितारगंज में बड़े भाई ने छोटे भाई को मौत के घाट उतार दिया। अप्रैल 2025 में जिला मुख्यालय की गल्ला मंडी में दुकान कब्जे को लेकर पिता-पुत्र की निर्मम हत्या ने पूरे शहर को झकझोर दिया। नवंबर में भूरारानी क्षेत्र में पत्नी की हत्या और हालिया फाजलपुर महरौला की वारदात ने हालात की गंभीरता को और उजागर कर दिया।
पुलिस के दावे बनाम हकीकत
पुलिस प्रशासन अपराधों पर लगाम लगाने के दावे कर रहा है, लेकिन बढ़ते हत्या के आंकड़े इन दावों की सच्चाई बयान कर रहे हैं।
“कानून व्यवस्था बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। आपराधिक घटनाओं का त्वरित खुलासा कर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है।”
— मणिकांत मिश्रा, एसएसपी, ऊधम सिंह नगर
हालांकि सवाल अब भी कायम है कि जब हर साल औसतन 40 लोग कत्ल हो रहे हैं, तो अपराधियों में कानून का डर आखिर कहां गया? तराई को खून के इस दलदल से बाहर निकालना पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।
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