उत्तराखंड में 1 अक्टूबर से शुरू होगा खनन सत्र: विभाग के सामने 1500 करोड़ के नए राजस्व लक्ष्य को हासिल करने की चुनौती; तकनीक से रखी जा रही अवैध खनन पर नजर

देहरादून। मानसून सत्र की समाप्ति के बाद आगामी 1 अक्टूबर से प्रदेश में खनन गतिविधियां एक बार फिर रफ्तार पकड़ने जा रही हैं। इसके साथ ही राज्य सरकार और खनन विभाग के सामने बीते दो वर्षों में बने राजस्व संग्रह के रिकॉर्ड को बरकरार रखने की बड़ी चुनौती होगी। वित्तीय वर्ष 2025-26 में खनन विभाग ने 950 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 1217 करोड़ रुपये का अब तक का रिकॉर्ड राजस्व अर्जित किया था, जबकि इससे पूर्व 2024-25 में भी 1041 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड कमाई हुई थी। चालू वित्तीय वर्ष के लिए सरकार ने 1500 करोड़ रुपये का विशाल लक्ष्य रखा है, जिसे प्राप्त करने के लिए नदियां खुलने के साथ ही बड़े पैमाने पर निकासी शुरू की जाएगी।
माइनिंग डिजिटल सर्विलांस और 45 ई-चेक गेटों से निगरानी, अवैध खनन पर कसेगा शिकंजा
प्रदेश में खनन क्षेत्र को पारदर्शी बनाने और अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए सरकार तकनीक आधारित डिजिटल प्रणालियों पर विशेष जोर दे रही है। ‘माइनिंग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम’ के तहत देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर और नैनीताल जिलों में 45 ई-चेक गेट स्थापित किए गए हैं, जो स्वचालित नंबर प्लेट पहचान कैमरों (ANPR) और आरएफआईडी (RFID) तकनीक से लैस हैं। इसके अलावा ई-रवन्ना, माइनिंग ई-सर्विस और डिजिटल अभिलेख प्रणालियों में नए सुरक्षा फीचर्स जोड़कर अवैध परिवहन पर पूरी तरह लगाम लगाने की तैयारी की गई है।

