गर्व के क्षण: पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को ‘पद्म भूषण’ सम्मान, बागेश्वर से महाराष्ट्र तक खुशी की लहर

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बागेश्वर: गणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर भारत सरकार ने नागरिक सम्मानों की घोषणा की, जिसमें उत्तराखंड के कद्दावर नेता और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को सार्वजनिक जीवन में उनके अतुलनीय योगदान के लिए पद्म भूषण (देश का तीसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान) देने का निर्णय लिया गया है।

🏠 पैतृक गांव नामती चेटाबगड़ में जश्न

सम्मान की घोषणा होते ही उनके गृह जनपद बागेश्वर और पैतृक गांव नामती चेटाबगड़ में दिवाली जैसा माहौल है।

  • ग्रामीणों का उत्साह: गांव के नारायण सिंह कोश्यारी ने बताया कि “भगतदा” का अपनी मिट्टी से आज भी उतना ही जुड़ाव है और इस सम्मान ने हर उत्तराखंडी का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

  • जनप्रतिनिधियों की बधाई: विधायक सुरेश गढ़िया और दर्जा मंत्री भूपेश उपाध्याय सहित कई नेताओं ने इसे उत्तराखंड की राजनीति और समाज सेवा के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है।

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📚 एक नजर: ‘भगतदा’ का गौरवशाली सफर (1942 – वर्तमान)

भगत सिंह कोश्यारी का जीवन संघर्ष और सेवा की एक खुली किताब है:

कालखंड मुख्य उपलब्धियां/पद
1961 अल्मोड़ा कॉलेज के छात्रसंघ महासचिव (राजनीति की शुरुआत)।
1975 आपातकाल का विरोध करते हुए 21 महीने जेल में रहे।
2001 – 2002 उत्तराखंड राज्य के दूसरे मुख्यमंत्री बने।
2002 – 2007 उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष।
2008 – 2014 राज्यसभा सांसद।
2014 – 2019 नैनीताल-ऊधमसिंह नगर से लोकसभा सांसद।
2019 – 2023 महाराष्ट्र के राज्यपाल (गोवा का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला)।
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✒️ शिक्षा और वैचारिक पृष्ठभूमि

  • विद्वान व्यक्तित्व: कोश्यारी जी ने आगरा विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में शिक्षा ग्रहण की। वे एक प्रखर वक्ता और लेखक भी रहे हैं।

  • वैचारिक आधार: वे छात्र जीवन से ही आरएसएस (RSS) से जुड़े रहे और उत्तराखंड भाजपा के पहले प्रदेश अध्यक्ष के रूप में संगठन को खड़ा करने में मुख्य भूमिका निभाई।

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🎤 सम्मान का आधार

केंद्र सरकार ने उनके दीर्घकालीन राजनीतिक अनुभव, प्रशासनिक कुशलता और सामाजिक कार्यों को इस सम्मान का आधार बनाया है। चाहे मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सेवा हो या राज्यपाल के रूप में संवैधानिक गरिमा का निर्वहन, कोश्यारी जी ने हर भूमिका में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी है।

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