उत्तराखंड में कुदरत का कहर: 24 घंटे की मूसलाधार बारिश से बेपटरी हुआ जनजीवन, काशीपुर में रिकॉर्ड 206 मिमी वर्षा, आज 10 जिलों में स्कूल बंद

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देहरादून:

उत्तराखंड में पिछले 24 घंटे से जारी मूसलाधार बारिश ने पूरे प्रदेश में भारी तबाही मचाई है। लगातार हो रही वर्षा के कारण पहाड़ से लेकर मैदान तक जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। जहां एक ओर पर्वतीय जिलों में लगातार हो रहे भूस्खलन (लैंडस्लाइड) से मुख्य राजमार्ग और संपर्क मार्ग बाधित हो गए हैं, वहीं मैदानी क्षेत्रों में जलभराव के कारण कई स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। इस आपदा का सबसे भीषण असर ऊधमसिंह नगर के काशीपुर और हरिद्वार के रुड़की में देखने को मिला है। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों में राज्य में सर्वाधिक 206 मिलीमीटर बारिश अकेले काशीपुर में दर्ज की गई है।

10 जिलों में आज भारी बारिश का ‘रेड और ऑरेंज अलर्ट’, स्कूल-आंगनबाड़ी बंद

मौसम की गंभीरता को देखते हुए मौसम विज्ञान केंद्र ने शुक्रवार के लिए राज्य के कई जिलों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का ‘रेड अलर्ट’ और ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। विभाग ने ऊधमसिंह नगर, नैनीताल और चंपावत जिलों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है, जबकि देहरादून, हरिद्वार, पौड़ी और बागेश्वर में ‘ऑरेंज अलर्ट’ की चेतावनी दी है।

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इस भारी खतरे को भांपते हुए प्रशासन ने एहतियाती कदम उठाए हैं। देहरादून, पौड़ी, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग, हरिद्वार, नैनीताल, ऊधमसिंह नगर, चंपावत और बागेश्वर समेत कुल 10 जिलों में शुक्रवार को कक्षा 12वीं तक के सभी सरकारी व निजी विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में एक दिवसीय पूर्ण अवकाश घोषित कर दिया गया है।

भूस्खलन से 107 मार्ग अवरुद्ध, बदरीनाथ हाईवे और चीन सीमा संपर्क प्रभावित

लगातार हो रही बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में सड़कें मलबे में तब्दील हो गई हैं। वर्तमान में राज्य के भीतर लगभग 107 संपर्क मार्ग भूस्खलन के कारण पूरी तरह ठप हैं।

  • गढ़वाल मंडल: चमोली और कर्णप्रयाग क्षेत्र में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। चमोली में बदरीनाथ हाईवे पर भनेरपानी के पास विशाल चट्टान गिरने से राष्ट्रीय राजमार्ग करीब साढ़े तीन घंटे तक बंद रहा। गढ़वाल के विभिन्न हिस्सों में 20 से अधिक मार्ग बार-बार बंद हो रहे हैं। टिहरी जिले में भूस्खलन की चपेट में आने से एक पुराना मकान ढह गया।

  • कुमाऊं मंडल: अंतरराष्ट्रीय महत्व के कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर चंपा मंदिर के पास भारी चट्टानें खिसकने से चीन सीमा को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ऊधमसिंह नगर को छोड़कर कुमाऊं के शेष पांच जिलों में 54 से अधिक सड़कें मलबे के कारण बंद पड़ी हैं। इसके अलावा, प्रसिद्ध नैनीताल झील का जलस्तर अत्यधिक बढ़ जाने के कारण प्रशासन ने पर्यटकों के लिए नौकायन (बोटिंग) पर पूरी तरह रोक लगा दी है।

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उफान पर नदियां, तापमान में भारी गिरावट

इस मूसलाधार बारिश की वजह से प्रदेश की प्रमुख नदियां उफान पर हैं। अलकनंदा (श्रीनगर), पिंडर (कर्णप्रयाग), गंगा (देवप्रयाग और ऋषिकेश), काली (धारचूला), सरयू (पिथौरागढ़) और गौरी (जौलजीबी) नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, हालांकि राहत की बात यह है कि ये सभी नदियां अभी खतरे के निशान से थोड़ा नीचे बह रही हैं। वहीं, लगातार हो रही वर्षा के कारण राज्य के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से 4 से 8 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया है, जिससे मौसम में ठंडक आ गई है।

“मौसम विभाग की गंभीर चेतावनी को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह अलर्ट पर है। हमारी जनता से अपील है कि वे इस संवेदनशील समय में किसी भी प्रकार की गैर-जरूरी या अनावश्यक यात्रा करने से बचें। विशेषकर पहाड़ी मार्गों और भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में जाने से पूरी तरह परहेज करें।”

विनोद कुमार सुमन, सचिव, आपदा प्रबंधन (उत्तराखंड)

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