जज साहब! मेरी मां को बाप ने नहीं मामा ने मारा, 11 साल बाद बेटे ने कोर्ट में बताई हत्या की कहानी

गाजियाबाद में 11 साल पहले हुए एक महिला की हत्या के मामले में कोर्ट ने हत्यारोपी पति को बरी कर दिया है. एडीजे कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान लग तो रहा था कि हत्यारोपी पति को सजा होगी, लेकिन उसके बेटे के बयान ने पूरे मामले को पलट कर रख दिया.
बेटे ने कोर्ट में बयान दिया कि उसकी मां की हत्या उसके पिता ने नहीं, बल्कि उसके मामा ने अपने साथियों के साथ मिलकर की थी. इस बयान के बाद कोर्ट ने तथ्यों की पड़ताल की और संदेह का लाभ देते हुए हत्यारोपी को बरी कर दिया.
इसी के साथ कोर्ट ने पुलिस को मामले की नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं. यह मामला साल 2012 का है. केस डायरी के मुताबिक यहां विजय नगर इलाके में रहने वाले दिनेश कुमार स्थानीय निवासी यास्मीन से प्यार करता था और प्यार के खातिर ही वह साल 2006 में धर्म परिवर्तन कर गुड्डू खान बन गया. इस शादी से यास्मीन के घर वाले खुश नहीं थे. ऐसे में दोनों परिवार से अलग रहने लगे. इसी बीच अगस्त 2012 में यास्मीन की हत्या हो गई.
इस संबंध में यास्मीन के भाई अकरम ने गुड्डू को आरोपी बताते हुए मुकदमा दर्ज कर दिया. पुलिस ने भी उसी समय गुड्डू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. लेकिन 11 साल तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट में गुड्डू निदोष साबित हुआ है. पुलिस की ओर से कोर्ट में पेश केस डायरी के मुताबिक अकरम ने अपनी शिकायत में बताया था कि 19 अगस्त 2012 की रात वह अपने मकान की छत पर सो रहा था. सुबह के करीब 3 बजे से अपनी बहन यास्मीन के कमरे से कुछ आवाज सुनाई दी.
जब वह मौके पर पहुंचा तो देखा कि उसकी बहन जमीन पर लथपथ पड़ी है और आरोपी गुड्डू कैंची से उसके ऊपर वार कर रहा है.अकरम ने पुलिस को बताया कि परिवार की मर्जी के खिलाफ उसकी बहन यास्मीन ने गुड्डू से शादी की थी. लेकिन शादी के बाद से ही दोनों में लड़ाई होती थी. इसी दौरान गुड्डू ने यास्मीन को किसी राजू नामक व्यक्ति से फोन पर बात करने सुन लिया. इससे गुड्डू को यास्मीन के चरित्र पर शक हो गया और उसने इस वारदात को अंजाम दिया.
बेटे ने कोर्ट में बताया आंखो देखा हाल
पुलिस ने इस मामले में पूरे परिवार की गवाही कराई. इसमें गुड्डू और यास्मीन के 14 साल के बेटे को भी अदालत में पेश किया गया. वारदात के वक्त यास्मीन का बेटा महज चार साल का था. उसने कोर्ट में बताया कि उसकी मां की हत्या उसके पिता ने नहीं, बल्कि उसके मामा ने अपने साथियों के साथ मिलकर की है. वारदात के वक्त तो उसके पिता घटना स्थल पर थे ही नहीं. बेटे ने अपने बयान में बताया कि उसने खुद अपने मामा को मां की हत्या करते देखा था.
बेटे ने कोर्ट को बताया कि चूंकि उसकी मां ने दूसरे धर्म के युवक से शादी की थी, इसलिए उसके मामा और परिवार के लोग नाराज थे. ये लोग उसके पिता को अपने आसपास भी देखना नहीं चाहते थे. लड़के ने बताया कि उसके मामा के परिवार वालों की कटुता के चलते ही वह खुद घटना के कुछ दिन बाद अपने दादा दादी के घर बदायूं चला गया था. मामले की सुनवाई करते हुए अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीता सिंह ने संदेह के आधार पर हत्यारोपी गुड्डू को बरी कर दिया.
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