फांसी की सजा से बाल-बाल बचे सुरेंद्र कोली का फांसी के फंदे से ही हुआ अंत, दुकान में लटकता मिला शव

नोएडा/प्रयागराज। देश भर को झकझोर देने वाले चर्चित निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली ने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली है। सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद जेल से रिहा हुए कोली का शव किराए की दुकान में लटकता मिलने की खबर इंटरनेट मीडिया पर तेजी से फैल गई, जिसे लेकर लोग तरह-तरह की चर्चाएं कर रहे हैं। गौरतलब है कि साल 2009 से 2017 के बीच सीबीआई की विशेष अदालतों ने सुरेंद्र कोली और उसके मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को कई मामलों में फांसी की सजा सुनाई थी, हालांकि अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में दोनों को बरी कर दिया था, जिस पर नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी मुहर लगाई थी। अदालत से फांसी की सजा से बाल-बाल बचने के बावजूद कोली का अंत फांसी के फंदे से ही हुआ।
अतिक्रमण अभियान का तनाव या कोई और मजबूरी? घटना को लेकर तरह-तरह के कयास
दिसंबर 2006 में नोएडा के निठारी गांव स्थित कोठी के नाले से बच्चों के कंकाल मिलने के बाद पूरे देश में हाहाकार मच गया था और आरोपियों को सख्त सजा देने की मांग उठी थी। जेल से छूटने के बाद कोली ने हाल ही में दो महीने का 14 हजार रुपये किराया देकर एक दुकान शुरू की थी। कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी कुंभ की तैयारियों के तहत चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान के कारण दुकान हटने के तनाव में उसने यह आत्मघाती कदम उठाया, हालांकि वह दुकान पूर्व में डेयरी आउटलेट रहने के कारण हटने के दायरे में नहीं थी। जघन्य आरोपों और लंबे ट्रायल के दौरान कभी हिम्मत न हारने वाले कोली द्वारा अचानक इस तरह जान दिए जाने को लेकर लोग तरह-तरह के सवाल भी उठा रहे हैं।

