
राजू अनेजा, काशीपुर।मिनी पंजाब के रूप में पहचाने जाने वाले शांत काशीपुर में अब जमीन की लड़ाई जानलेवा होती जा रही है। भोले भाले किसानों पर भूमाफियाओं का ऐसा शिकंजा कसता जा रहा है कि किसान अपनी ही जमीन को बचाने की जद्दोजहद में टूटते जा रहे हैं। हाल ही में किसान सुखवंत सिंह की आत्महत्या का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब एक और 80 वर्षीय बुजुर्ग किसान ओमप्रकाश की मौत ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार खड़गपुर देवीपुरा निवासी ओमप्रकाश वर्षों से अपनी कृषि भूमि पर खेती कर रहे थे। आरोप है कि भूमाफियाओं ने उनकी जमीन पर कब्जा करने के लिए पहले दबाव बनाया और फिर बाउंड्री वॉल खड़ी कर दी। अपनी आंखों के सामने जीवन भर की मेहनत को हड़पते देख बुजुर्ग गहरे मानसिक आघात में चले गए। परिजनों के अनुसार, लगातार तनाव और प्रताड़ना के चलते उनकी हालत बिगड़ती गई और अंततः उन्होंने दम तोड़ दिया।
मृतक के पुत्र जितेंद्र अरोड़ा ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि 12 अप्रैल को जब वे खेत पर पहुंचे तो वहां मजदूर नींव खोदते मिले। पूछताछ करने पर बताया गया कि जमीन खरीदी जा चुकी है। विरोध करने पर धमकियां दी गईं कि पूरी जमीन पर कब्जा कर लिया जाएगा। इसके बाद परिवार ने पुलिस, एसडीएम और तहसील प्रशासन के चक्कर काटे, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
20 अप्रैल को राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचे तो आरोप है कि वरुण कुमार शर्मा और उसके साथियों ने बुजुर्ग किसान और उनके बेटे के साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के बाद बुजुर्ग पूरी तरह से मानसिक रूप से टूट गए।
21 अप्रैल को शाम करीब 4:15 बजे, दुकान पर बैठे-बैठे ओमप्रकाश ने दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि यह सामान्य मौत नहीं, बल्कि भूमाफियाओं के दबाव और सिस्टम की लापरवाही से हुई मौत है।
बुजुर्ग की मौत के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने साफ कहा कि जब तक जमीन की पैमाइश और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। प्रशासन को मजबूरन मौके पर पहुंचना पड़ा। पैमाइश में शिकायत सही पाई गई और अवैध बाउंड्री वॉल को ढहा दिया गया। इसके बाद ही अंतिम संस्कार किया गया।
इधर, पुलिस ने भी मामले में कार्रवाई करते हुए जितेंद्र चावला और वरुण कुमार शर्मा के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लेकिन सवाल यह है कि जब तक जान नहीं जाती, तब तक सिस्टम क्यों नहीं जागता?
काशीपुर में यह दूसरी बड़ी घटना है, जिसने यह साफ कर दिया है कि जमीन पर कब्जे की लड़ाई अब किसानों के लिए जीवन-मरण का सवाल बन चुकी है। एक तरफ भूमाफियाओं का बढ़ता हौसला, दूसरी तरफ प्रशासन की धीमी कार्रवाई—बीच में पिस रहा है किसान।
सबसे बड़ा सवाल—
क्या काशीपुर में भूमाफियाओं पर लगाम लगेगी या यूं ही किसान अपनी जमीन के साथ-साथ अपनी जान भी गंवाते रहेंगे?
अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें

