चैती मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद चखा रहे “प्यारी पहाड़न ” में मण्डूये के मोमो की मची धूम, मेले में दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु बड़े चाव के साथ उठा रहे है पहाड़ी व्यंजनों का लुत्फ
Devotees coming to the Chaiti fair are getting the taste of Pahari cuisine, "Pyaari Pahadan" has created a boom in Manduya's momos, devotees coming from far and wide are enjoying the Pahari cuisine with great enthusiasm


राजू अनेजा, काशीपुर। काशीपुर में चल रहे उत्तर भारत के प्रख्यात चेती मेले में लगा पहाड़ी व्यंजनों का स्टॉल प्यारी पहाड़न यहां आने वाले श्रद्धालुओं को पहाड़ी व्यजंनों का स्वाद चखा रहा है जहां पर विभिन्न प्रकार के पहाड़ी व्यंजनों के साथ सुप्रसिद्ध मण्डूये के मोमो ने काफी धूम मचा रखी है,मेले में आने वाले श्रद्धालु बड़े चाव के साथ प्यारी पहाड़न स्टॉल में आकर मण्डूये के मोमो का स्वाद लेते नजर आते है वही मेले में सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था को संभाल रही खाकी भी प्यारी पहाड़न के स्वादिष्ट व्यंजनों की मुरीद हो चुकी है।

बताते चले कि अभी तक बाजार में विभिन्न प्रकार के चाइनीज फूड जैसे कि चाउमीन ,बर्गर ,मोमो,पास्ता,माइक्रोनिक आदि ने अपना कब्जा इस तरह से जमा रखा है कि लोग बड़े चाव के साथ इन चाइनीज व्यंजनों का स्वाद लेते नजर आती है परंतु विभिन्न प्रकार के रसायन से तैयार यह चाइनीस फूड स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक बताए जाते हैं वही जाती हे वही चेती मेले में लगे पहाड़ी व्यंजनों के स्टाल प्यारी पहाड़न में आने वाले श्रद्धालुओं को पहाड़ के विभिन्न व्यंजनों से रूबरू कराने का भरसक प्रयास किया जा रहा है जो कि स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ के लिए काफी लाभदायक है जो कि इंसान की इम्युनिटी बढ़ाने में भी काफी कारगर साबित होते है।
प्यारी पहाड़न के स्वामी ने बताया कि यहां के व्यंजन पौष्टिक और स्वादिष्ट होने के साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाते हैं।उन्होंने बताया कि पहाड़ी अनाज सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं। मंडुवा मधुमेह की बीमारी में बेहद कारगर है। यह शरीर में चीनी की मात्रा नियंत्रित कर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। झंगोरा पेट संबधी बीमारियों को दूर करता है। काले भट में प्रोटीन की प्रचुर मात्रा होती है। गहथ की दाल की तासीर गर्म होने के कारण यह गुर्दे की पथरी में बेहद फायदेमंद है।
मंडवे की रोटी
मंडवे की रोटी गढ़वाल में सबसे अधिक खाया जाने वाला प्रमुखता लिए..गढ़वाल के लोग अक्सर चूल्हे की मोटी-मोटी रोटी बनाते है और तिल या भांग की चटनी के साथ बड़े चाव से खाते है।
झंगोरे की खीर:
झंगोरे की खीर की डिश काफी प्रसिद्ध है। झंगोरे की खीर दूध से बनाई जाती है। इसमें मेवे मिलाए जाते हैं। इससे इसका स्वाद गजब का हो जाता है।
भट के डुबके:
यह व्यंजन प्रमुख रूप कुमाऊं क्षेत्र का पारंपरिक पकवान है। यह उच्च प्रोटीन व फाइबर से भरपूर है। यह डिश भट या फिर काले सोयाबीन से बनाई जाती है। यह पाचन में मदद करती है। रक्तचाप को कम करता है। इसमें विटामिन ई और अमीनो एसिड पाया जाता है।
भांग की चटनी
भांग से बनी चटनी के स्वाद का क्या कहना। इसे भांग के भुने बीज व जीरे के साथ बनाया जाता है। नींबू का रस, हरी मिर्च व धनिया पत्ती से इसका स्वाद बढ़ जाता है। भांग की चटनी प्रोटीन का भंडार है। सर्दियों के मौसम में पहाड़ी हरी सब्जियों के साथ ही मूली की सब्जी, आलू के गुटके में भी इसका प्रयोग किया जाता है।
गहत के परांठे
सुबह के नाश्ते के लिए गहत की दाल के परांठे गढ़वाल में बहुत ही प्रसिद्ध हैं। तासीर से गर्म गहत पहाड़ी मौसम के लिहाज से भी लाभदायक है। भांग की चटनी के साथ इसका स्वाद और निखर जाता है। लोग गहत की दाल को भूनकर भी खाना पसंद करते हैं। आमतौर पर इसके लिए मंडवे के आटे का इस्तेमाल होता है।
मण्डूये के मोमो
मोमोज के शौकीन हैं लेकिन मैदा नहीं खाना चाहते तो मंडुआ अथवा रागी के आटे के स्वादिष्ट मोमो आपको बहुत पसंद आएंगे।
मंडुआ कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर है तथा मंडुआ से शरीर में मोटापा की समस्या भी नहीं आती है। स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहतमंद होने की वजह से आज के समय में मंडुआ के मोमो लोगों के बीच में काफी लोकप्रिय हो रहे हैं. पहाड़ों में मंडुआ को कोदा भी कहा जाता है। मंडुआ के मोमो को आजकल पहाड़ी मोमो या कोदे के मोमो के नाम से भी जाना जा रहा है।
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