कीड़ाजड़ी पर पड़ी मौसम की मार, इस वर्ष उत्पादन में रिकॉर्ड कमी

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पिथौरागढ़. हिमालयन वियाग्रा के नाम से मशहूर कीड़ाजड़ी पर इस बार मौसम की भारी मार पड़ी है. इस वर्ष मौसम के मिजाज में आए बदलाव का असर कीड़ाजड़ी के उत्पादन पर भी पड़ा है. स्थिति तो ये है कि बहुमूल्य कीड़ाजड़ी के दोहन के लिए गए लोगों को पूरी तरह निराश लौटना पड़ा है.

कीड़ाजड़ी का कम उत्पादन होने से हजारों की आबादी पर रोजी-रोटी का संकट भी गहरा गया है. स्थिति यह है कि बीते सालों के मुकाबले इस बार सिर्फ 10 प्रतिशत ही कीड़ाजड़ी का चुगान हो पाया है.

दरअसल, इस वर्ष ठंड के मौसम में बर्फबारी नही के बराबर हुई थी. लेकिन, अप्रैल के बाद ऊंचे इलाकों में लगातार बारिश और बर्फबारी जारी है. जबकि; बीते सालों तक अप्रैल से कीड़ाजड़ी का दोहन शुरू हो जाता था. ऐसे में मौसम के बदले रुख की सबसे अधिक मार कीड़ाजड़ी पर पड़ी है. हालात ये है कि ऊंचे बुग्यालों में महीनों गुजारने के बाद भी लोगों को एक किलो कीड़ाजड़ी नसीब नहीं हो पाई है.

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बमुश्किल 30 किलो कीड़ाजड़ी मिल पाई इस साल

उप प्रभागीय वनाधिकारी ज्वाला प्रसाद गौड़ का कहना है कि इस साल जाड़ों में बर्फबारी नहीं हुई थी. लेकिन, अप्रैल के बाद ऊंचे इलाकों में बर्फबारी लगातार हुई है. जिस कारण कीड़ाजड़ी का उत्पादन काफी कम हो गया है. 10 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर होने वाली कीड़ाजड़ी इंटरनेशनल मार्केट में 25 लाख रूपये किलो तक बिकती है. बीते सालों की बात करें तो 2019 में जहां 400 किलो कीड़ाजड़ी का दोहन हुआ था. वहीं, 2020 में तीन सौ किलो कीड़ाजड़ी आसानी से निकाली गई. लेकिन, इस बार लाख कोशिशों के बाद भी 30 किलो कीड़ाजड़ी नहीं मिल पाई है.

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पहाड़ी में ऊंचाई पर कीड़ाजड़ी आमदनी का माध्यम

यहां बता दें कि ऊंचे इलाकों में रहने वाले हजारों परिवारों की आय का कीड़ाजड़ी इकलौता जरिया है. ऐसे में इसके उत्पादन में रिकॉर्ड कमी ने हजारों परिवारों पर संकट गहरा दिया है. उत्तराखंड में धारचूला, मुनस्यारी और चमोली क्षेत्र के लोग कीड़ाजड़ी पर निर्भर हैं. मुनस्यारी के जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया की मानें तो कीड़ाजड़ी के उत्पादन में रिकॉर्ड कमी के कारण करीब 80 हजार परिवार सीधे प्रभावित हुए हैं.

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भारत, नेपाल और तिब्बत में ही मिलती है कीड़ाजड़ी

गौरतलब है कि दुनिया में कीड़ाजड़ी भारत, नेपाल और तिब्बत में ही होती है. ऐसे में इंटरनेशनल मार्केट में लोग इसे हाथों हाथ लेते भी हैं. कीड़ाजड़ी पॉवर बूस्टर होने के साथ ही गंभीर रोगों के लिए दवाईयां बनाने के काम भी आती है. लेकिन, इस साल मौसम के बदले मिजाज ने हिमालयी गोल्ड को निगल लिया है.

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