हल्द्वानी: काठगोदाम में पानी के लिए हाहाकार; कलसिया पुल निर्माण ने बढ़ाई मुसीबत, अब जीपीएस से होगी टैंकरों की निगरानी
हल्द्वानी के काठगोदाम क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से पेयजल संकट गहराया हुआ है। पहले गौला नदी में सिल्ट (गाद) आने से फिल्टर प्लांट ठप रहा और अब कलसिया पुल के पास पाइपलाइन शिफ्टिंग के कार्य ने करीब 12 हजार की आबादी की प्यास बढ़ा दी है। भीषण गर्मी के बीच काठगोदाम रेलवे स्टेशन, बाजार क्षेत्र और वार्ड संख्या 1 व 34 में पिछले तीन दिनों से नलों में पानी नहीं टपका, जिसके चलते लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
संकट के मुख्य कारण और जनता का दर्द
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पाइपलाइन शिफ्टिंग: कलसिया पुल निर्माण के कारण गुरुवार से पुलिस चौकी के पास पाइपलाइन बदलने का काम चल रहा था, जिससे शनिवार तक आपूर्ति पूरी तरह ठप रही।
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सिल्ट की समस्या: इससे पूर्व बारिश के कारण गौला नदी में भारी सिल्ट आने से शीतलाहाट फिल्टर प्लांट से जलापूर्ति प्रभावित हुई थी।
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जनता की आवाज: स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऊँचाई वाला क्षेत्र होने के कारण यहाँ गर्मियों में पानी पहुँचता नहीं और बरसात में गाद रास्ता रोक लेती है। टैंकरों के भरोसे कब तक गुजारा होगा?
प्रशासनिक आश्वासन और राहत कार्य
जल संस्थान के सहायक अभियंता चंदन देवड़ी ने बताया कि शनिवार को पाइपलाइन शिफ्टिंग का कार्य पूरा कर लिया गया है और रविवार सुबह से जलापूर्ति सामान्य हो जाएगी। वर्तमान में प्रभावित क्षेत्रों में चार टैंकरों के जरिए पानी बांटा जा रहा है।
हाईटेक होगी जलापूर्ति: टैंकरों पर लगेगा GPS
पेयजल वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए जल संस्थान ने एक बड़ा फैसला लिया है। अब विभाग के सभी 20 टैंकरों को जीपीएस (GPS) से लैस किया जाएगा।
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लाइव निगरानी: कंट्रोल रूम से टैंकरों की लोकेशन, रूट और गंतव्य की लाइव ट्रैकिंग होगी।
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शिकायतों का समाधान: अक्सर टैंकरों के समय पर न पहुँचने या रूट बदलने की शिकायतें मिलती थीं। जीपीएस लगने से चालकों की जवाबदेही तय होगी और पानी की बर्बादी पर रोक लगेगी।
नोट: जल संस्थान ने दावा किया है कि इस तकनीक से गर्मियों में होने वाली पेयजल किल्लत के दौरान टैंकरों का वितरण अधिक न्यायपूर्ण और सटीक होगा।
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