आंधी में गिरे सिर्फ तीन पेड़, बाकी नौ पर भी चला जेसीबी का पंजा! जड़ों समेत उखाड़े गए पेड़ों ने खड़े किए सवाल, आखिर किसके इशारे पर उजाड़ी गई पार्क की हरियाली?
राजू अनेजा,काशीपुर। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बचाने की बातें करना आसान है, लेकिन जब आपकेहरे-भरे पेड़ों को बचाने की बारी आती है तो इन दावों की असलियत सामने आ जाती है। शहर के अग्रसेन पार्क में कुछ ऐसा ही नजारा सामने आने की बात कही जा रही है। यहां आई आंधी में तीन पेड़ गिरने की जानकारी है, लेकिन इसके बाद बाकी नौ पेड़ों को भी जेसीबी की मदद से जड़ समेत जमीन से उखाड़ दिया गया। अब सवाल यह है कि आखिर इन नौ पेड़ों ने ऐसा कौन सा गुनाह कर दिया था कि उन्हें भी जमीन से उखाड़ने की नौबत आ गई?
तीन पेड़ गिरे तो बाकी नौ की जड़ों पर क्यों चला जेसीबी का पंजा?
मामला केवल पेड़ों के गिरने या हटाए जाने तक सीमित नहीं है। सवाल उस तरीके और उसके पीछे की वजह का है। यदि तीन पेड़ आंधी में गिरे थे तो बाकी नौ पेड़ों को भी क्यों हटाया गया? क्या वे सभी पेड़ भी आंधी की चपेट में आकर गिर गए थे या फिर मशीनों की मदद से उन्हें अलग से उखाड़ा गया? स्थानीय स्तर पर सामने आए घटनाक्रम के मुताबिक, जेसीबी से पेड़ों को जड़ों समेत उखाड़े जाने की बात सामने आई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी हो गई है।
आंधी के खाते में कितने पेड़, जेसीबी के खाते में कितने?
हैरानी इस बात की है कि यदि पेड़ों को हटाने की कार्रवाई की गई तो उसका कारण सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा? क्या पेड़ों को हटाने से पहले उनकी स्थिति का तकनीकी आकलन कराया गया था? क्या सक्षम विभाग से अनुमति ली गई थी? और सबसे बड़ा सवाल यह कि अगर पेड़ स्वस्थ थे तो उन्हें जड़ समेत उखाड़ने की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?
हरियाली बचाने के दावे और जमीन पर उजड़ी हरियाली!
अग्रसेन पार्क शहर के लोगों के लिए हरियाली और सुकून का स्थान है। यहां लोग घूमने आते हैं, बुजुर्ग समय बिताते हैं और बच्चे खुले वातावरण में खेलते हैं। ऐसे स्थान पर पेड़ों का इस तरह हटाया जाना पर्यावरण संरक्षण के दावों पर सवाल खड़े करता है। एक तरफ पौधरोपण और हरित शहर बनाने के अभियान चलाए जाते हैं, दूसरी तरफ यदि पुराने पेड़ों को ही जड़ समेत उखाड़ दिया जाए तो इन अभियानों का मतलब क्या रह जाता है?
अब जवाबदेही तय होनी चाहिए!
संबंधित जिम्मेदारों को स्पष्ट करना चाहिए कि पार्क में कुल कितने पेड़ आंधी से गिरे और कितने पेड़ों को जेसीबी से हटाया गया। यदि नौ पेड़ों को अलग से उखाड़ा गया है तो इसके पीछे का आदेश, अनुमति और कारण भी सार्वजनिक होना चाहिए। साथ ही यह भी बताया जाना चाहिए कि उनकी जगह कितने नए पेड़ लगाए जाएंगे और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी किसकी होगी।
सवाल सीधा है—क्या आंधी सिर्फ तीन पेड़ों को गिराकर गई थी या बाकी नौ पेड़ों की जड़ों तक भी उसका कहर पहुंच गया था? अगर बाकी पेड़ मशीन से उखाड़े गए तो उनकी जिम्मेदारी किसकी है?
अग्रसेन पार्क की उजड़ी हरियाली अब जवाब मांग रही है। पेड़ों की जड़ें जमीन से जरूर निकल गईं, लेकिन उनके साथ उठे सवालों को इतनी आसानी से जमीन में नहीं दबाया जा सकता।
अपने मोबाइल पर ताज़ा अपडेट पाने के लिए -
👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप को ज्वाइन करें


